नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि पत्नी स्नातक तक की पढ़ाई कर चुकी है, उसे नौकरी के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और यह नहीं माना जा सकता कि वह अलग रह रहे पति से गुजारा भत्ता पाने के लिए जानबूझकर काम नहीं कर रही. अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक व्यक्ति ने इस आधार पर पत्नी को दिए जाने वाले अंतरिम गुजारा भत्ते की राशि 25 हजार रुपये से घटाकर 15 हजार रुपये करने का अनुरोध किया था कि वह (पत्नी) विज्ञान में स्नातक तक पढ़ी हुई है.
पत्नी पढ़ी-लिखी है तो इसका यह मतलब नहीं कि उसे नौकरी के लिए मजबूर किया जाए: अदालत
Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 25 Oct 2023 07:57 PM
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