
भारत ने वैश्विक डिजिटल सेवा बाजार में अपनी मौजूदगी को लगातार मजबूत किया है। 2025 में भारत का डिजिटल सेवा निर्यात 317 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2024 के 277 अरब डॉलर के मुकाबले करीब 15 फीसदी की वृद्धि है। 2015 में यह आंकड़ा लगभग 92 अरब डॉलर था।
कंप्यूटर और व्यावसायिक सेवाओं का बड़ा योगदान
भारत का डिजिटल सेवा निर्यात अभी भी मुख्य रूप से कंप्यूटर और व्यावसायिक सेवाओं पर केंद्रित है। 2025 में व्यावसायिक सेवाओं की हिस्सेदारी 54.6 फीसदी, जबकि कंप्यूटर सेवाओं की हिस्सेदारी 39.2 फीसदी रही।
इसके अलावा वित्तीय सेवाओं की हिस्सेदारी 2.4 फीसदी, व्यक्तिगत एवं सांस्कृतिक सेवाओं की 1.2 फीसदी, बीमा और पेंशन की 1.1 फीसदी तथा दूरसंचार सेवाओं की 0.8 फीसदी रही।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत
2024 से 2025 के बीच भारत के सेवा निर्यात में करीब 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। इसी अवधि में ब्रिटेन में 11 फीसदी, चीन और अमेरिका में 10-10 फीसदी तथा जर्मनी में 9 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। भारत की वैश्विक डिजिटल सेवा निर्यात में हिस्सेदारी भी 5.8 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी हो गई।
आईटी से आगे बढ़ रही सेवाओं की पहुंच
भारत की डिजिटल सेवाओं की ताकत अब केवल पारंपरिक आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाओं तक सीमित नहीं है। कंसल्टिंग, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा, अनुसंधान एवं विकास, एनालिटिक्स और तकनीक-सक्षम पेशेवर सेवाओं में भी भारतीय कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है।
देश में बढ़ते ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) भी इस विस्तार को समर्थन दे रहे हैं। भारतीय कंपनियां क्लाउड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, एनालिटिक्स और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही हैं।
एआई और हाई-वैल्यू सेवाओं पर जोर
डिजिटल सेवा निर्यात को आगे बढ़ाने के लिए एआई आधारित सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, इंजीनियरिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
छोटी कंपनियों और नए सेवा प्रदाताओं के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान बनाना भी महत्वपूर्ण होगा। इससे भारत के डिजिटल सेवा निर्यात का आधार और व्यापक हो सकता है।



