बैंकॉक. एक चीनी अनुसंधान पोत के श्रीलंका में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह पर लंगर डालने के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत अपने पड़ोस में किसी भी ऐसे घटनाक्रम की निगरानी करता है, जिसका उसकी सुरक्षा पर असर पड़ता है.
उन्होंने मंगलवार को श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर मिसाइल एवं उपग्रह ट्रैंिकग पोत ‘युआन वांग 5’ के लंगर डालने के बारे में पूछे जाने पर यह टिप्पणी की. जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की 9वीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचे. संयुक्त आयोग की बैठक के बाद थाईलैंड के अपने समकक्ष डोन प्रमुदविनई के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल पर जयशंकर ने कहा, ‘‘हमारे पड़ोस में जो कुछ भी होता है, कोई भी घटनाक्रम, जिसका हमारे सुरक्षा मुद्दों पर प्रभाव पड़ता है, उस पर हमारी नजर रहती है.’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि कुछ समय पहले एक प्रवक्ता ने कहा था, हम स्पष्ट रूप से किसी भी घटनाक्रम की बहुत सावधानी से निगरानी करते हैं, जिसका हमारे हितों पर असर पड़ता है. ’’ श्रीलंकाई अधिकारियों ने कहा है कि चीनी पोत 22 अगस्त तक दक्षिणी श्रीलंकाई बंदरगाह पर रहेगा. पोत मूल रूप से 11 अगस्त को चीनी संचालित बंदरगाह पर पहुंचने वाला था, लेकिन श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा अनुमति के अभाव में इसमें देरी हुई.
भारत की चिंताओं के बीच श्रीलंका ने चीन से पोत की यात्रा टालने को कहा था. शनिवार को, कोलंबो ने 16 से 22 अगस्त तक पोत को बंदरगाह तक पहुंच इस शर्त के साथ प्रदान की कि वह केवल श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) को चालू रखेगा और कोई वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं किया जाएगा.
चीन का कहना है कि पोत का इस्तेमाल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया जाता है, लेकिन अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि पोत चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की कमान के अंतर्गत है और उपग्रहों और मिसाइल प्रक्षेपणों को ट्रैक करने में सक्षम है. चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पोत ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार’ वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहा है.
भारत ने रूस से तेल खरीदने के अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले की अमेरिका और दुनिया के अन्य देश भले ही सराहना नहीं करें, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है कि नयी दिल्ली ने अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया. उन्होंने कहा कि भारत ने इसके साथ ही उन्हें यह एहसास कराया कि तेल एवं गैस की ‘‘अनुचित रूप से अधिक’’ कीमतों के बीच सरकार का अपने लोगों के प्रति ‘‘नैतिक दायित्व’’ है.
जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की नौवीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचे और उन्होंने एक समारोह में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के साथ मुलाकात के दौरान यूक्रेन एवं रूस के मध्य जारी युद्ध के बीच, रूस से कम दाम पर तेल खरीदने के भारत के फैसले का बचाव किया और कहा कि भारत के कई आपूर्तिकर्ताओं ने अब यूरोप को आपूर्ति करना शुरू कर दिया है, जो रूस से कम तेल खरीद रहा है.
उन्होंने कहा कि तेल की कीमत ‘‘अनुचित रूप से अधिक’’ हैं और यही हाल गैस की कीमत का है. उन्होंने कहा कि एशिया के कई पारंपरिक आपूर्तिकर्ता अब यूरोप को आपूर्ति कर रहे हैं, क्योंकि यूरोप रूस से कम तेल खरीद रहा है. जयशंकर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘आज स्थिति ऐसी है कि हर देश अपने नागरिकों के लिए सर्वश्रेष्ठ सौदा करने की कोशिश करेगा, ताकि वह इन उच्च कीमतों का असर झेल सके और हम यही कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत ‘‘रक्षात्मक तरीके’’ से ऐसा नहीं कर रहा है.
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम अपने हितों को लेकर बहुत खुले एवं ईमानदार रहे हैं. मेरे देश में प्रति व्यक्ति आय दो हजार डॉलर है. वे लोग ऊर्जा की अत्यधिक कीमत को वहन नहीं कर सकते.’’ उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना सरकार का ‘‘दायित्व’’ एवं ‘‘नैतिक कर्तव्य’’ है कि भारत के हित सर्वोपरि हों.
रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि न केवल अमेरिका बल्कि अमेरिका समेत सभी जानते हैं कि हमारी क्या स्थिति है और वे इस बारे में अब आगे बढ़ चुके हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब आप खुलकर और ईमानदारी से अपनी बात रखते हैं, तो लोग उसे स्वीकार कर लेते हैं.’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘वे हमेशा संभवत: उसकी सराहना नहीं करेंगे, लेकिन जब आप बात करते हैं और चालाकी करने की कोशिश नहीं करते, जब आप बिल्कुल सीधे तरीके से अपने हित सामने रखते हैं, तो मुझे लगता है कि दुनिया वास्तविकता को काफी हद तक स्वीकार कर लेती है.’’ यूक्रेन पर रूस ने 24 फरवरी को हमला कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए.
किसी देश की ‘सॉफ्ट पावर’ समाज की रचनात्मक आकांक्षाओं को दर्शाती है: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि किसी देश की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक शक्ति (सॉफ्ट पावर) उसके समाज की रचनात्मक आकांक्षाओं को दर्शाती है और सरकार उसे आगे बढ़ाने में ही मदद कर सकती है. उन्होंने देश की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक ताकत को और अधिक बढ़ाने के लिए विश्व स्तर पर बाजरा, आयुर्वेद, योग और पारंपरिक चिकित्सा के रूपों को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला. जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की नौवीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचे और उन्होंने एक कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की.
जयशंकर ने एक 16 वर्षीय थाई-भारतीय लड़की के सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘यह समाज संचालित गतिविधि है. ‘सॉफ्ट पावर’ की विशेषता यह है कि यह ‘सॉफ्ट’ होती है क्योंकि यह सरकार द्वारा संचालित नहीं होती है. यह समाज की रचनात्मक आकांक्षाओं को दर्शाती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से, सरकार इसे आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है और इसका एक उदाहरण अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है.’’
उन्होंने कहा कि खाड़ी, उत्तरी अफ्रीका और मध्य एशिया दुनिया के ऐसे क्षेत्र हैं जहां शायद भारतीय ‘सॉफ्ट पावर’ सबसे मजबूत है. उन्होंने कहा, ‘‘2014 तक ऐसा नहीं था कि लोग विदेश में योग नहीं करते थे. लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को यह प्रेरणा मिली कि हमें इसे अंतरराष्ट्रीय उत्सव बनाना चाहिए और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र में इसे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था.’’
जयशंकर ने कहा कि उन्हें लगता है कि आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एकमात्र ऐसा दिन है, जिसमें दुनिया में सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव मनाया जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे लिए और अधिक प्रयास करने की एक प्रेरणा होनी चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज हम आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के रूपों को बढ़ावा दे रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत के जामनगर में पारंपरिक दवाओं का पहला वैश्विक केंद्र स्थापित किया है.