नयी दिल्ली. नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री माइकल स्पेंस ने कहा है कि भारत आने वाले दशकों में अपनी आर्थिक और भू-राजनीतिक भूमिका को बढ़ावा देने के लिए तैयार है जिसमें उसे जनांकिकीय लाभांश, तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और उच्च जीडीपी वृद्धि से मदद मिलेगी. स्पेंस ने एक टेलीविजन चैनल के साथ बातचीत में कहा कि प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर भारत की छलांग देश के आर्थिक विस्तार में प्रमुख उत्प्रेरक साबित होगी.
वर्ष 2001 में अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार हासिल करने वाले स्पेंस ने कहा कि दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी महत्वपूर्ण स्थिति है. उन्होंने कहा, ”पिछले 25 साल दुनिया के लगभग हर कोने में किसी न किसी रूप में वृद्धि के बारे में सोचते हुए बिताने वाले शख्स के तौर पर मैं बस यह कहना चाहता हूं कि सबसे अधिक संभावित वृद्धि दर वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था भारत है.” जाने-माने अर्थशास्त्री ने कहा कि भारत ने अबतक दुनिया में सबसे अच्छी डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय संरचना का सफलतापूर्वक विकास किया है. उन्होंने कहा, ‘यह एक बदलावकारी संरचना है.’
उन्होंने क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि क्रिप्टोकरेंसी कोई मुद्रा नहीं है क्योंकि एक मुद्रा विनिमय का माध्यम होने के साथ मूल्य का भंडार भी होती है. उन्होंने कहा कि यह केवल उन लोगों के लिए एक मुद्रा है जो डार्कनेट में छिपना चाहते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा का वजूद होगा.