मुंबई/नयी दिल्ली. लोकसभा चुनावों से पहले मुंबई में कांग्रेस को झटका देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने ”विकास के पथ पर चलने के लिए” रविवार सुबह पार्टी छोड़ दी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना में शामिल हो गए. इसके साथ ही, देवरा ने कांग्रेस पार्टी के साथ अपने परिवार के 55 साल पुराने रिश्ते को खत्म कर दिया.
‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की शुरूआत होने से ठीक पहले देवरा के इस्तीफा देने पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनके पार्टी (कांग्रेस) छोड़ने की घोषणा का समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यात्रा का जवाब देने के लिए किया, ताकि इसे मीडिया में प्रमुख खबर बनाया जा सके. दक्षिण मुंबई से पूर्व सांसद देवरा ने रविवार सुबह ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से अपने इस्तीफे की घोषणा की.
उन्होंने कहा, ”मेरी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय आज समाप्त हो गया. मैंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी के साथ मेरे परिवार का 55 साल पुराना रिश्ता खत्म हो गया है. मैं वर्षों से उनके अटूट समर्थन के लिए सभी नेताओं, सहर्किमयों और कार्यकर्ताओं का आभारी हूं.” बाद में, वह पूजा-अर्चना करने प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर गए.
दोपहर में, देवरा मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में एक कार्यक्रम में शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हो गए.
इससे पहले दिन में, जब देवरा दक्षिण मुंबई स्थित अपने आवास रामायलम से बाहर आए तो उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह ”विकास के पथ पर चलने” जा रहे हैं. देवरा हाल में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संयुक्त कोषाध्यक्ष नियुक्त किये गए थे. देवरा ने दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट पर उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूबीटी) द्वारा दावा किये जाने पर असहमति जतायी थी. उन्होंने इस सीट का पूर्व में प्रतिनिधित्व किया है.
हालांकि, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में इस सीट पर शिवसेना के अरविंद सावंत से उन्हें शिकस्त मिली थी. सावंत, ठाकरे गुट में हैं. देवरा कभी कांग्रेस की मुंबई इकाई के प्रमुख भी रहे थे. वह पार्टी के दिवंगत नेता मुरली देवरा के बेटे हैं. मिलिंद देवरा के ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करने के बाद, कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री देवरा ने उस दिन पार्टी छोड़ी है जब राहुल गांधी की अगुवाई में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ हिंसाग्रस्त मणिपुर से शुरू हुई है.
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने इसे ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ से ध्यान भटकाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की साजिश बताया और ”दो बार का हारा उम्मीदवार” बताकर देवरा पर तंज कसा. पटोले ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ से डरी हुई है.
उन्होंने कहा, ”भाजपा अफवाह फैला रही है कि कांग्रेस में विभाजन होगा. अब भाजपा और उसके सहयोगी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ से ध्यान भटकाने के लिए दो बार के हारे उम्मीदवार को अपने खेमे में शामिल कर रहे हैं. यह प्रयास कामयाब नहीं होगा.” पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण ने कहा कि देवरा दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं.
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने रविवार को कहा कि दक्षिण मुंबई लोकसभा सीट पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. राउत ने कहा, ”सावंत दो बार के सांसद हैं. उनके दोबारा चुनाव लड़ने में क्या गलत है? इस पर कोई समझौता नहीं होगा.” शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की नेता सुप्रिया सुले ने रविवार को भाजपा का मखौल उड़ाया और पूछा कि क्या उसके पास अपनी कोई प्रतिभा नहीं है. देवरा के इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर सुले ने कांग्रेस नेताओं के पाला बदलकर सत्तारूढ़ दल में जाने के स्पष्ट संदर्भ में कहा कि भाजपा और उसके सहयोगी दल, कांग्रेस पार्टी बनते जा रहे हैं.
विकास के पथ की ओर अग्रसर हूं : देवरा ने कांग्रेस छोड़ने के बाद कहा
कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने रविवार को कहा कि वह ”विकास के पथ” की ओर अग्रसर हैं.
वह पेडर रोड पर स्थित अपने आवास ‘रामालयम’ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. अपनी पत्नी पूजा के साथ प्रभादेवी में सिद्धिविनायक मंदिर में पूजा करने के लिए घर से निकले देवरा ने कहा, ”मैं विकास के पथ की ओर अग्रसर हूं.” संयोग से एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के विधायक सदा सरवणकर भी मंदिर में मौजूद थे. वह मंदिर न्यास के प्रमुख भी हैं.
देवरा के मुख्यमंत्री शिंदे के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में उनसे मुलाकात करने और शिवसेना में शामिल होने की संभावना है. इससे पहले, दक्षिण मुंबई सीट से लोकसभा के पूर्व सदस्य देवरा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”आज मेरी राजनीतिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हुआ. मैंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और इसी के साथ पार्टी से मेरे परिवार का 55 साल पुराना रिश्ता खत्म हो गया है. मैं वर्षों तक अटूट समर्थन देने के लिए सभी नेताओं, सहर्किमयों और कार्यकर्ताओं का आभारी हूं.”
देवरा का राहुल गांधी पर परोक्ष हमला, कहा-कांग्रेस उद्योगपतियों को गाली देती है, उन्हें राष्ट्र-विरोधी कहती है
पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने रविवार को शिवसेना में शामिल होने के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी अब वैसी नहीं है, जैसी पहले हुआ करती थी, जब मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधार शुरू किए थे. उन्होंने कहा कि अब पार्टी उद्योगपतियों, कारोबारियों को गाली देती है और उन्हें राष्ट्र-विरोधी कहती है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में एक सभा को संबोधित करते हुए देवरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास देश के विकास के लिए एक दृष्टिकोण है. उन्होंने शिंदे को ऐसा मुख्यमंत्री बताया, जिनतक पहुंच बहुत आसान है.
उन्होंने कहा, ”कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लेना आसान नहीं था, जिसके साथ देवरा परिवार 55 वर्षों से जुड़ा रहा. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अच्छे लोगों की आवश्यकता है. यह शिंदे और लोकसभा सदस्य श्रीकांत शिंदे की राय है कि मैं उनके दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व कर सकता हूं और मुझ पर भरोसा करने के लिए मैं उनका आभारी हूं.” देवरा ने शिंदे की ओर इशारा करते हुए कहा, ”मैं एक बात बताना चाहता हूं, जब कांग्रेस कठिन दौर से गुजर रही थी तब मैं उसके प्रति वफादार था. मैं 2004 में कांग्रेस में शामिल हुआ. अगर कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने रचनात्मक सुझावों और योग्यता पर ध्यान केंद्रित किया होता, तो हम यहां नहीं बैठे नहीं होते.” शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ जून 2022 में बगावत कर दी थी, जिससे शिवसेना विभाजित हो गई.
पूर्व केंद्रीय मंत्री देवरा ने कहा, ”30 साल पहले जब मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे, तब कांग्रेस पार्टी ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की थी, लेकिन अब वह उद्योगपतियों और व्यापारियों को गाली दे रही है और उन्हें राष्ट्र-विरोधी कह रही है.” हालांकि, देवरा ने कांग्रेस के किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन जाहिर तौर पर उनका इशारा राहुल गांधी की ओर था, जो अक्सर अडाणी समूह की आलोचना करते हैं.
मिलिंद देवरा: बेहतर भविष्य के लिए पार्टी छोड़ने वाले कांग्रेस के युवा नेताओं में शामिल
पूर्व केंद्रीय मंत्री और दक्षिण मुंबई से पूर्व सांसद मिलिंद देवरा रविवार को कांग्रेस से इस्तीफा देने के साथ ही उन युवा नेताओं की सूची में शामिल हो गए, जिन्होंने अन्य पार्टियों, मुख्य रूप से भाजपा में नयी पारी शुरू करने के लिए इसे छोड़ दिया. यह इस्तीफा उन युवा नेताओं की अनसुनी चिंताओं की निरंतर गाथा का भी संकेत देता है, जिन्हें एक समय पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का करीबी माना जाता था. कांग्रेस के घटते जनाधार के बीच नवीनतम घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के निचले स्तर के साथ गांधी परिवार का जुड़ाव कमजोर होने को भी उजागर करता है, जिसे युवा नेता स्वीकार करने में असमर्थ हैं.
देवरा के करीबी सूत्रों ने कहा कि उन्होंने ”बहुत लंबे और निरर्थक इंतजार” के बाद पार्टी छोड़ दी. सूत्रों ने कहा कि पूर्व लोकसभा सदस्य अपनी ही पार्टी से यह आश्वासन नहीं पा सके कि उन्हें आगामी आम चुनाव में मुंबई दक्षिण से चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा, जिस सीट का प्रतिनिधित्व दशकों से उनका परिवार करता रहा है.
देवरा के सहयोगियों ने कहा, ”शिवसेना (यूबीटी) खुले तौर पर मुंबई दक्षिण सीट पर दावा कर रही है और कांग्रेस मिलिंद देवरा को सीट का आश्वासन देने में असमर्थ रही. एक युवा नेता का राजनीतिक भविष्य अनिश्चितता में था और कोई समाधान नहीं था.” देवरा ने कांग्रेस के साथ अपने परिवार का 55 साल पुराना रिश्ता खत्म कर दिया है. उनके दिवंगत पिता मुरली देवरा एक कद्दावर शख्सियत थे और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में पेट्रोलियम मंत्री थे.
देवरा खेमे द्वारा जतायी गयी चिंताओं का उल्लेख उन नेताओं ने भी किया है जो पूर्व में पार्टी छोड़ चुके हैं. पुराने मुद्दों का समाधान नहीं होने और पार्टी के भीतर गुटबाजी के कारण राहुल गांधी के पूर्ववर्ती खेमे के कई होनहार नेताओं को पार्टी छोड़नी पड़ी. शीर्ष नेतृत्व द्वारा किए गए वादों को पूरा न करने के बावजूद सचिन पायलट कांग्रेस में बने रहे. उन्होंने 2020 में अपना सुर नरम कर लिया और यह कहते हुए कांग्रेस में लौट आए कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अपने मतभेद खत्म कर लिए हैं.
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई में गुटबाजी को लेकर इतने धैर्यवान नहीं थे. उन्होंने मार्च 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. सिंधिया ने कहा था कि वह वरिष्ठ नेता कमलनाथ से मिलने वाले अपमान को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते. जून 2021 में संप्रग के एक अन्य पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद ने लोगों के साथ पार्टी की बढ.ती दूरियों का हवाला देते हुए कांग्रेस छोड़ दी.
इसके बाद पलायन का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें प्रियंका चतुर्वेदी अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गईं, पूर्व महिला कांग्रेस प्रमुख सुष्मिता देव टीएमसी से जुड़ गईं जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री आर पी एन सिंह, पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ और पार्टी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल भाजपा में शामिल हो गए.
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के समय असम कांग्रेस के कद्दावर नेता हिमंत विश्व शर्मा के पार्टी छोड़ने के साथ भाजपा में जाने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह वास्तव में कभी नहीं रुका और कई बड़े नेताओं के इस्तीफे जारी रहे, यहां तक कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह भी 2022 में पंजाब चुनाव से पहले व्यक्तिगत अपमान का हवाला देते हुए भाजपा में चले गए.
देवरा के एक सहयोगी ने उनके फैसले के बारे में बताते हुए कहा, ”राहुल गांधी से मिल पाना असंभव है. यह स्पष्ट रूप से एक अलगाव है और व्यक्ति घुटन महसूस करता है.” इसी तरह के विचार पहले शर्मा सहित अधिकांश नेताओं द्वारा उनके पार्टी से बाहर निकलने के समय व्यक्त किए गए थे. राहुल गांधी का व्यक्तिगत रूप से लंबे समय से यह मानना रहा है कि जो लोग पद छोड़ना चाहते हैं वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं.
कांग्रेस नेतृत्व यह कहता रहा है कि ऐसे नेता पार्टी छोड़ रहे हैं जो वैचारिक लड़ाई में भाजपा से मुकाबला करने की क्षमता नहीं रखते . उन्होंने कहा, ”एक बार माहौल हमारे पक्ष में हो जाए तो ये सभी नेता वापस लौट आएंगे. उनके लिए यह पार्टी से ऊपर व्यक्तिगत मामला है.” कांग्रेस ने देवरा के इस्तीफे के समय पर भी सवाल उठाया, जो राहुल गांधी द्वारा रविवार को मणिपुर से मुंबई तक अपनी महत्वाकांक्षी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ शुरू करने से कुछ घंटे पहले आया. देवरा के पार्टी छोड़ने के ठीक बाद भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ”कांग्रेस को न्याय यात्रा शुरू करने के बजाय पहले अपने नेताओं को न्याय देना चाहिए.”