प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सेवा संकल्प यात्रा के प्रतिभागियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने यात्रियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि सेवा ही जीवन और सार्वजनिक कार्यों का मुख्य मकसद होना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे केवल सेवा की बातें न करें, बल्कि अपने कार्यों के जरिए इसका संदेश लोगों तक पहुंचाएं।
‘सेवा हमारा मुख्य मकसद होना चाहिए’
प्रतिभागियों से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सेवा का रास्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाई हासिल कर ले या उसे कितनी भी राजनीतिक शक्ति मिल जाए, उसका व्यवहार सेवा की भावना को दर्शाने वाला होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सेवा परमो धर्म’ के सिद्धांत को अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यात्रियों से अपना ध्यान रखने और यात्रा के दौरान सेवा के उद्देश्य को प्राथमिकता देने की बात कही।
पुरानी कहावत का किया जिक्र
पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान एक पुरानी कहावत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति यात्रा से लौटता है और उसे प्रणाम किया जाता है तो यात्रा से प्राप्त आध्यात्मिक पुण्य का आधा हिस्सा प्रणाम करने वाले को भी मिलता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसलिए वे सभी सेवा यात्रियों को नमन करके उस पुण्य में सहभागी बन रहे हैं।
20 टीमें तय करेंगी 35,500 किलोमीटर की दूरी
सेवा संकल्प यात्रा के तहत 20 टीमें करीब 35,500 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। ये यात्री वड़नगर और वाराणसी के बीच अलग-अलग मार्गों से गुजरते हुए कस्बों, जिलों, तालुकों और गांवों तक सेवा की भावना और सामुदायिक भागीदारी का संदेश पहुंचा रहे हैं।
यह अभियान 17 सितंबर से 7 अक्तूबर तक चल रहा है। इसके तहत वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर तक यात्राएं आयोजित की जा रही हैं।
युवाओं की भागीदारी पर भी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत में युवाओं की भागीदारी का भी उल्लेख हुआ। यात्रा से जुड़े प्रतिभागियों ने युवाओं के जुड़ाव की जानकारी साझा की। अभियान के जरिए युवाओं को सामाजिक और सामुदायिक सेवा से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
क्या है सेवा संकल्प यात्रा?
सेवा संकल्प यात्रा पीएम मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन से जुड़े सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और गांवों तक पहुंचकर सामुदायिक सेवा तथा लोगों की भागीदारी वाली गतिविधियों को बढ़ावा देना है।