मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 के गढ़चिरौली विस्फोट मामले में कथित नक्सली कार्यकर्ता सत्यनारायण रानी को आरोपमुक्त करने से इनकार करते हुए कहा कि उसके खिलाफ सबूत पेश किए गए हैं. इस हमले में 15 पुलिसर्किमयों और एक आम नागरिक की मौत हो गई थी. न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने 10 जुलाई को 73 वर्षीय रानी की उस अपील को खारिज कर दिया था जिसमें अगस्त 2021 के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उसे रानी को मामले से आरोपमुक्त करने से इनकार करने वाले विशेष अदालत के आदेश में कोई खामी नजर नहीं आती. रानी की अपील खारिज करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराई गई.
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामले में दायर आरोपपत्र से पता चलता है कि रानी सहित अन्य आरोपी एक प्रतिबंधित संगठन के सदस्य थे और उन्होंने भारत में सरकार को अस्थिर करने तथा उखाड़ फेंकने की साजिश रची थी. इसने कहा कि सबूतों के अवलोकन से रानी के अन्य सह-आरोपियों के साथ एक बड़ी साजिश और उस बैठक में शामिल होने का पता चलता है जहाँ 40 नक्सलियों के मारे जाने का बदला लेने के लिए सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला करने की योजना बनाई गई.