‘आदिवासी’ केवल शब्द नहीं, यह एक संस्कृति है: झारखंड के राज्यपाल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 08 Aug 2024 07:44 PM
‘आदिवासी’ केवल शब्द नहीं, यह एक संस्कृति है: झारखंड के राज्यपाल
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रांची. झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘आदिवासी’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक संस्कृति है.
राज्यपाल ‘रांची विमिंस कॉलेज’ में विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे.

उन्होंने कहा, ”आदिवासी सिर्फ एक शब्द नहीं है, यह हमारी संस्कृति है. अगर हम अपनी संस्कृति और परंपरा को भूल जाएंगे तो हम अपने समाज और देश को नुकसान पहुंचाएंगे. हमें अपनी संस्कृति को संरक्षित करने की जरूरत है.” आदिवासी परंपरा की सराहना करते हुए गंगवार ने कहा, ”मुझे यहां पता चला कि आदिवासी समाज में लड़की की शादी में पैसे (दहेज) देने की प्रथा नहीं है. यह बहुत अच्छी परंपरा है और हमें यह समझना होगा कि इन अच्छी चीजों को कैसे अपनाया जाए.”

इससे पहले रांची विमिंस कॉलेज में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय प्राचीन काल से ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है. उन्होंने कहा, ”उनकी कला, संस्कृति, लोक साहित्य, परंपराएं और रीति-रिवाज विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं.” राज्यपाल ने कहा कि राज्य की 3.28 करोड़ आबादी में आदिवासी समुदाय का योगदान लगभग 27 प्रतिशत है, इसके अलावा राज्य में 32 प्रकार की अनुसूचित जनजातियां हैं जिनमें आठ प्रकार के विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह (पीवीटीजी) शामिल हैं.

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