विमान दुर्घटना: पायलट की भूमिका पर निष्कर्ष जल्दबाजी- पूर्व एएआईबी प्रमुख

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 13 Jul 2025 09:19 PM
विमान दुर्घटना: पायलट की भूमिका पर निष्कर्ष जल्दबाजी- पूर्व एएआईबी प्रमुख
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नयी दिल्ली/मुंबई. एएआईबी के पूर्व प्रमुख अरबिंदो हांडा ने रविवार को कहा कि पिछले महीने अहमदाबाद में एअर इंडिया (एआई) के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से जुड़ी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पायलट की भूमिका के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा कि अंतिम रिपोर्ट में दुर्घटना के सर्वाधिक संभावित कारण का उल्लेख होगा.

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा एयर इंडिया विमान हादसे की जांच से जुड़ी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी करने के एक दिन बाद हांडा ने कहा, ”हमें एएआईबी को निष्पक्ष, पक्षपात रहित और पारदर्शी तरीके से जांच पूरी करने की अनुमति देनी चाहिए.” हांडा ने 2020 में कोझिकोड में हुई एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान दुर्घटना सहित 100 से अधिक विमान दुर्घटनाओं की जांच की है.

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”एएआईबी ने अच्छा काम किया है. आगे बढ.ते हुए, वे अब यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि ये ईंधन स्विच क्यों और कैसे हिले और क्या कोई यांत्रिक और/या विद्युत विफलता/खराबी हो सकती है.” शनिवार को जारी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटनाग्रस्त ‘बोइंग 787-8’ विमान के इंजनों के ईंधन स्विच एक सेकंड के अंतराल में बंद हो गए थे और बाद में चालू हो गए.

कॉकपिट की वॉयस रिकॉर्डिंग में, एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है कि उसने स्विच क्यों बंद किया और दूसरा पायलट कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया. रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि किस पायलट ने सवाल पूछा और किस पायलट ने जवाब दिया. उड़ान की कमान सह-पायलट के पास थी और ‘पायलट इन कमांड’ (पीआईसी) उड़ान के दौरान पायलट की निगरानी कर रहे थे.

हांडा ने कहा, ”एअर इंडिया की उड़ान संख्या 171 पर एएआईबी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना, जिसमें किसी एक पायलट की भूमिका भी शामिल है, जल्दबाजी होगी… हमें एएआईबी को निष्पक्ष, पक्षपात रहित और पारदर्शी तरीके से जांच पूरी करने देनी चाहिए.” पायलट इन कमांड (पीआईसी) 56 वर्षीय कैप्टन सुमीत सभरवाल थे और सह-पायलट के रूप में ‘फर्स्ट ऑफिसर’ 32 वर्षीय क्लाइव कुंदर थे. सभरवाल का बोइंग 787 के साथ उड़ान अनुभव 8,596 घंटों से अधिक का था, जिसमें पीआईसी के रूप में 8,260 घंटे शामिल हैं.

इसी तरह कुंदर का इस तरह के विमान के साथ उड़ान अनुभव 1,128 घंटे का था. उड़ान के दौरान विमान की कमान कुंदर के पास थी, जबकि सभरवाल लगभग 12 साल पुराने बोइंग 787-8 विमान से संचालित इस उड़ान के दौरान पायलट की निगरानी कर रहे थे. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पायलट ने उड़ान भरने से पहले पर्याप्त आराम किया था.

हांडा ने कहा, ”कुछ जगहों पर खासकर विदेशी मीडिया में, यह संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि किसी एक पायलट की गलती हो सकती है. एक बार फिर, मैं विमानन क्षेत्र के अपने अनुभवी लोगों से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे किसी भी तरह की अटकलों से बचें.
अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना 12 साल पुराना बोइंग 787-8 विमान गत 12 जून को उड़ान भरने के तुरंत बाद एक इमारत से टकरा गया और 260 लोगों की मौत हो गई. विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक ही जीवित बचा. नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने शनिवार को कहा कि एअर इंडिया विमान दुर्घटना में पायलट की भूमिका के बारे में किसी भी निष्कर्ष पर तुरंत नहीं पहुंचना चाहिए और अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार करने से पहले कई पहलुओं पर गौर करने की आवश्यकता है.

एआई171 उड़ान के चालक दल ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिम्मेदारी से काम किया: पायलट एसोसिएशन

‘इंडियन कॉर्मिशयल पायलट्स एसोसिएशन’ (आईसीपीए) ने रविवार को कहा कि पिछले महीने दुर्घटनाग्रस्त हुए एआई171 उड़ान के चालक दल ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने प्रशिक्षण और जिम्मेदारियों के अनुरूप काम किया तथा पायलटों को अटकलों के आधार पर बदनाम नहीं किया जाना चाहिए.

एसोसिएशन ने कुछ हलकों में पायलट के आत्महत्या करने संबंधी अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, कोई भी अटकलबाजी अस्वीकार्य है और इसकी निंदा की जानी चाहिए.

‘एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने भी एअर इंडिया विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और तथ्य-आधारित जांच की मांग करते हुए शनिवार को दावा किया था कि हादसे की जांच की शैली और दिशा पायलट की गलती की ओर संकेत करने वाला पूर्वाग्रह है.
आईसीपीए टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया में ‘नैरो बॉडी’ वाले विमान बेड़े के पायलटों का संगठन है.

वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) ने 12 जून को बोइंग 787-8 विमान हादसे की अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसमें कुल 260 लोग मारे गए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि एअर इंडिया के विमान के अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त होने से कुछ सेकंड पहले, इसके दोनों इंजनों के ईंधन नियंत्रण स्विच बंद हो गए थे. पंद्रह पन्ने की रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉकपिट की आवाज रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है कि उसने ईंधन क्यों बंद किया, जिस पर दूसरा पायलट ईंधन बंद करने से इनकार करता है.

बारह जून को अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रहे एअर इंडिया की एआई171 उड़ान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में एएआईबी ने शनिवार को कहा कि बोइंग 787-8 विमान के ईंधन स्विच उड़ान भरने के तुरंत बाद बंद हो गए थे.
रिपोर्ट में कहा गया, ”कॉकपिट की आवाज रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है कि उसने ईंधन क्यों बंद किया, जिस पर दूसरा पायलट ईंधन बंद करने से इनकार करता है.” आईसीपीए ने रविवार को कहा कि वह मीडिया और कुछ सार्वजनिक चर्चाओं में लगाई जा रही अटकलों से बहुत परेशान है, विशेष रूप से पायलट की आत्महत्या के संबंध में लापरवाह और निराधार आरोप से.

आईसीपीए ने बयान में कहा, ”इस समय ऐसे दावे का कोई आधार नहीं है तथा अधूरी या प्रारंभिक जानकारी के आधार पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाना न केवल गैरजिम्मेदाराना है – बल्कि इसमें शामिल व्यक्तियों और परिवारों के प्रति भी असंवेदनशील रवैया है.” एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि पायलटों को व्यापक मनोवैज्ञानिक और पेशेवर जांच, औचक प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है, तथा सुरक्षा, जिम्मेदारी और मानसिक स्वास्थ्य के उच्चतम मानकों के तहत काम करना होता है.

आईसीपीए ने कहा कि वह सक्षम प्राधिकारियों द्वारा स्थापित कठोर जांच प्रोटोकॉल पर भरोसा करती है और उनका सम्मान करती है. साथ ही उसने कहा कि ये जांच विधिपूर्वक और बिना किसी पूर्वाग्रह के तथ्यों को सामने लाने के लिए तैयार की गई हैं.
आईसीपीए ने कहा, ”जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित नहीं हो जाती, कोई भी अटकलबाजी, विशेषकर इतनी गंभीर प्रकृति की, अस्वीकार्य है और इसकी निंदा की जानी चाहिए.” एएआईबी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा कि जांच जारी है और जांच दल हितधारकों से प्राप्त अतिरिक्त साक्ष्यों, अभिलेखों और सूचनाओं की समीक्षा और जांच करेगा.

एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलपीए) ने शनिवार को एअर इंडिया विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और तथ्य-आधारित जांच की मांग की. एएलपीए ने कहा था, ”जांच की शैली और दिशा पायलट की गलती की ओर संकेत करने वाला पूर्वाग्रह है…एएलपीए इंडिया इस धारणा को स्पष्ट रूप से खारिज करती है और निष्पक्ष, तथ्य-आधारित जांच पर जोर देती है.” एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि पारर्दिशता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उसके प्रतिनिधियों को जांच प्रक्रिया में पर्यवेक्षक बनाया जाए. एएलपीए इंडिया, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन (आईएफएएलपीए) का एक ‘मेंबर एसोसिएट’ है.

एयर इंडिया विमान दुर्घटना: एएआईबी जांचकर्ताओं का परिचय

संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम पिछले महीने गुजरात के अहमदाबाद में एअर इंडिया के विमान दुर्घटना की जांच कर रही है. इस दुर्घटना में 260 लोग मारे गए थे. विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) के निदेशक सिंह प्रभारी जांचकर्ता हैं और उप निदेशक जसबीर सिंह लारगा मुख्य जांचकर्ता हैं.

जांच दल में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के तीन अधिकारी उप निदेशक विपिन वेणु वरकोठ, सहायक निदेशक वीरराघवन के और वायु सुरक्षा अधिकारी वैष्णव विजयकुमार भी शामिल हैं. गत 12 जून को, एअर इंडिया का विमान अहमदाबाद से उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें विमान में सवार 241 यात्रियों समेत 260 लोगों की मौत हो गई थी. एक यात्री दुर्घटना में बच गया था. एएआईबी ने शुक्रवार देर रात एअर इंडिया विमान दुर्घटना पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दी.

एएआईबी ने कहा कि ड्रोन फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी सहित मलबा स्थल की गतिविधियां पूरी हो चुकी हैं और मलबे को हवाई अड्डे के पास एक सुरक्षित क्षेत्र में ले जाया गया है. यहां जांचकर्ताओं का संक्षिप्त विवरण दिया गया है

संजय कुमार सिंह
एएआईबी में निदेशक के रूप में, सिंह को विमान दुर्घटना जांच और सुरक्षा क्षेत्र में 15 वर्षों का अनुभव है.
सिंह (56) 15 दुर्घटनाओं/गंभीर घटनाओं की जांच के प्रबंधन में शामिल रहे हैं. उनके पास (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग विशेषज्ञता में स्नातक की डिग्री और एमबीए की डिग्री है.

जसबीर सिंह लारगा
एक दशक से एएआईबी के साथ, लारगा 2020 में कोझीकोड में हुए विमान दुर्घटना समेत विभिन्न विमान दुर्घटना जांच में शामिल रहे हैं. उन्होंने डीजीसीए के साथ-साथ पवन हंस और ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ के साथ भी काम किया है. एएआईबी में, और डीजीसीए में अपने कार्यकाल के दौरान, वह कई विमान दुर्घटना/गंभीर घटना जांच से जुड़े रहे हैं, जिसमें 2020 में कोझीकोड एअर इंडिया एक्सप्रेस विमान दुर्घटना, 2016 में गोवा हवाई अड्डे पर तत्कालीन जेट एयरवेज विमान का रनवे पर फिसलना और 2019 में मेंगलुरु हवाई अड्डे पर टैक्सीवे पर दुबई से आए एअर इंडिया एक्सप्रेस विमान का फिसलना शामिल है.

विपिन वेणु वरकोठ
वरकोठ सात साल से ज्यादा समय से मुंबई स्थित डीजीसीए में हवाई सुरक्षा के सहायक निदेशक हैं. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने लगभग सात साल तक हवाई सुरक्षा अधिकारी के रूप में भी काम किया है.

वीराराघवन के
वह लगभग चार वर्षों से मुंबई स्थित डीजीसीए में वायु सुरक्षा के सहायक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले, उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में नौ वर्षों तक वायु सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्य किया था. लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वीराराघवन ने चेन्नई में टाटा कंसल्टेंसी र्सिवसेज (टीसीएस) के साथ एक एनैलिसिस इंजीनियर के रूप में भी एक वर्ष से अधिक समय तक काम किया है.

वैष्णव विजयकुमार
वह डीजीसीए में वायु सुरक्षा अधिकारी हैं और विभिन्न विमान दुर्घटना/घटना जांच का हिस्सा रहे हैं.
एएआईबी के महानिदेशक जी.वी.जी. युगंधर ने 12 जून को हुई दुर्घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम नियुक्त की थी.

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