फौजा सिंह को टक्कर मारने वाले वाहन का चालक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 16 Jul 2025 09:55 PM
फौजा सिंह को टक्कर मारने वाले वाहन का चालक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
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चंडीगढ़/नयी दिल्ली/जालंधर. दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक 114 वर्षीय फौजा सिंह को अपनी कार से टक्कर मारने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है जो तीन हफ्ते पहले ही कनाडा से पंजाब में अपने पैतृक गांव लौटा था और एक अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.

जालंधर ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरविंदर सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अमृतपाल सिंह ढिल्लों (26) को मंगलवार रात गिरफ्तार किया गया और उसकी गाड़ी भी जब्त कर ली गई है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले को एक चुनौती के रूप में लिया और 30 घंटे के भीतर इसे सुलझा लिया.

बाद में ढिल्लों को जालंधर की एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
अधिकारी ने बताया कि करतारपुर निवासी ढिल्लों पर्यटक वीजा पर कनाडा गया था लेकिन वहां उसे वर्क परमिट मिल गया था जो 2027 तक वैध है. उन्होंने बताया कि आरोपी पिछले महीने के अंत में भारत लौटा था. ढिल्लों को करतारपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया.

एक सवाल के जवाब में एसएसपी ने संवाददाताओं को बताया कि ढिल्लों को कोई काम था और इसीलिए वह जल्दबाजी में स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) कार चला रहा था और कार ने फौजा सिंह को टक्कर मार दी. सिंह ने कहा, ” उस समय उन्हें कार से टकराए व्यक्ति की पहचान के बारे में पता नहीं था. टक्कर मारने के बाद वह घबरा गया था और इसीलिए उसने अपनी कार नहीं रोकी.” पुलिस अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि ढिल्लों जालंधर जा रहा था, लेकिन दुर्घटना के बाद वह गांवों के रास्ते घर लौट आया.
आरोपी ने पुलिस को यह भी बताया कि घटना वाले दिन उसने कार का एक टायर बदलवाया था.

सिंह के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि जब उसने सड़क पार कर रहे फौजा सिंह को टक्कर मारी, उस समय उसकी गाड़ी की रफ्तार काफी तेज थी. एसएसपी ने हालांकि कहा कि दुर्घटना के बाद ढिल्लों की यह जिम्मेदारी थी कि वह अपना वाहन रोककर फौजा सिंह को अस्पताल ले जाता. फौजा सिंह (114) जालंधर स्थित अपने पैतृक गांव ब्यास में जालंधर-पठानकोट राजमार्ग पर सोमवार दोपहर बाद टहलने निकले थे, तभी ढिल्लों के वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी.

ग्रामीणों के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि फौजा सिंह पांच से सात फुट तक हवा में उछल गए. हादसे में उनको गंभीर चोटें आईं और घटना वाले दिन सोमवार शाम को ही उनकी मौत हो गई. फौजा सिंह के बेटे हरविंदर सिंह ने बुधवार को जालंधर में संवाददाताओं से कहा कि ढिल्लों अपनी गाड़ी रोककर मैराथन धावक को तुरंत अस्पताल पहुंचा सकता था.

उन्होंने कहा, ”शायद इससे उनकी (फौजा सिंह) जान बच जाती. अगर वह भागा नहीं होता तो हम उसके (गलती करने वाले चालक) खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते.” एक अन्य सवाल के जवाब में एसएसपी ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला नहीं है. उन्होंने कहा, ” चूंकि भारतीय कारें बाईं ओर से चलती हैं जबकि कनाडा में दाईं ओर से इसलिए यह संभव है कि वह यहां वाहन ठीक से नहीं चला पाया हो.” उन्होंने बताया कि दुर्घटना के समय आरोपी गाड़ी में अकेला था.

एसएसपी ने संवाददाताओं को बताया, ”ढिल्लों वर्क परमिट पर कनाडा में रहता है और वहीं काम करता है. उसकी तीन बहनें और मां कनाडा में हैं.” सिंह ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर कहा था, ”हमने सीसीटीवी फुटेज से वाहन की पहचान कर ली है. यह पंजाब में पंजीकृत ‘टोयोटा फॉच्र्यूनर’ है. दुर्घटनास्थल से हमें गाड़ी की हेडलाइट के कुछ टुकड़े मिले थे. इसके बाद हमने वाहन का पता लगाया.” उन्होंने बताया, ”वाहन को एक से ज्यादा बार बेचा जा चुका है.” दुर्घटना से पहले की घटनाओं के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में पुलिस अधिकारी ने कहा कि फौजा सिंह दोपहर के भोजन के बाद अपने घर के पास जालंधर-पठानकोट राजमार्ग पर टहलने गए थे.

उन्होंने कहा, ”दोपहर करीब तीन बजकर आठ मिनट पर जब वह मुख्य सड़क पर पहुंचे तो एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी. कुछ राहगीरों और उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने उन्हें जालंधर के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया.” मैराथन धावक की मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए एसएसपी ने कहा कि उनकी मृत्यु इस तरह नहीं होनी चाहिए थी.

उन्होंने कहा, ”फौजा सिंह ने दुनिया भर में नाम कमाया और हम सभी को उन पर बहुत गर्व है.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मैराथन धावक के निधन पर शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सिंह एक असाधारण व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने विशिष्ट व्यक्तित्व से और ‘फिटनेस’ के विषय पर भारत के युवाओं को प्रेरित किया. फौजा सिंह ने 89 वर्ष की उम्र में मैराथन दौड़नी शुरू की थी और उनके जोश एवं जज्बे को दुनिया ने सलाम किया. उनकी एथलेटिक क्षमता के कारण उन्हें ”टर्बन्ड टॉरनेडो” कहा जाने लगा.

वर्ष 1911 में एक किसान परिवार में जन्में फौजा सिंह चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. वह 100 वर्ष की आयु में मैराथन पूरी करने वाले पहले व्यक्ति बने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए. वह 1990 के दशक में इंग्लैंड चले गए थे और हाल के वर्षों में पंजाब स्थित अपने पैतृक गांव में रहने के लिए लौट आए थे. वह 2012 के लंदन ओलंपिक में मशाल वाहक थे. उन्होंने लंदन, न्यूयॉर्क और हांगकांग की प्रसिद्ध मैराथन सहित कई मैराथन दौड़ में भाग लिया था.

उनकी सबसे यादगार दौड़ों में से एक 2011 की थी जब वह 100 वर्ष के हुए. टोरंटो में आयोजित प्रतियोगिता का नाम उनके सम्मान में रखा गया और उन्होंने अपने आयु वर्ग में कई विश्व रिकॉर्ड तोड़े. पिछले साल, सिंह नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए आयोजित एक ‘वॉकथॉन’ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के साथ शामिल हुए थे.

फौजा सिंह की दिली ख्वाहिश पूरी न हो सकी; ब्रिटेन में बिताना चाहते थे जिंदगी का अंतिम समय
दुनिया के सबसे उम्रदराज. मैराथन धावक 114 वर्षीय फौजा सिंह की यह दिली ख्वाहिश थी कि वह अपने जीवन का अंतिम समय ब्रिटेन में बिताएं, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी न हो सकी. ब्रिटेन से एक विशेष खेल कार्यक्रम के लिए पंजाब आए फौजा सिंह ने 2015 में व्यास गांव में अपने घर पर ‘भाषा’ के साथ विशेष बातचीत में यह इच्छा जाहिर की थी. उन्होंने इसका कारण भी बताया था.

उन्होंने जोर देकर कहा था, ”यहां(पंजाब) चोर उचक्के हर ओर हैं. पुलिस कुछ कर नहीं पाती. कब किसको चाकू मार देंगे और कहां लूट लेंगे, और कब कौन टक्कर मार कर चला जाएगा, यह कोई नहीं जानता. लंदन में ऐसा नहीं है. इसलिये अंतिम समय वहीं बिताना चाहता हूं.” उनकी यह आशंका सही साबित हुई. सोमवार को फौजा सिंह (114) जालंधर स्थित अपने पैतृक गांव ब्यास में जालंधर-पठानकोट राजमार्ग पर सोमवार दोपहर बाद टहलने निकले थे लेकिन उसी समय एक भीषण सड़क हादसे में उनकी जान चली गई.
एक सवाल पर फौजा ने चिढ़ कर कहा था, ”मैं यह कभी नहीं स्वीकार कर सकता हूं कि मैं बुजुर्ग हूं. मैं आपसे अधिक तेज और दूर तक पैदल चल सकता हूं. रही बात अंतिम समय की तो इसके लिये सबसे उपयुक्त जगत ब्रिटेन ही है.” फौजा सिंह को जिंदगीभर यह अफसोस सालता रहा कि वह भारत के लिए एक भी पदक नहीं जीत पाए. उन्होंने अपने जीवनकाल में धावक के रूप में जितने भी पदक जीते, वे सब बतौर ब्रिटिश नागरिक उनकी उपलब्धि थे.

पठानी कुर्ता और पायजामा पहने अपने घर में बैठे फौजा सिंह ने साक्षात्कार के दौरान कहा था, ”मुझे हमेशा इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं जब भी दौड़ा, और जितने भी मेडल लिये, उनमें से एक भी भारत के लिये नहीं था. लोग मुझे ब्रिटिश धावक कहते रहे. यह मुझे ठीक नहीं लगता था. लेकिन क्या कर सकता हूं, मैं ब्रिटिश नागरिक हो चुका हूं.” आह भरते हुये और अपने पदकों को दिखाते हुये फौजा ने कहा था, ”काश मैं अपने मुल्क इंडिया (भारत) के लिये कोई पदक जीत पाता. यह सब मैंने जीता है लेकिन ये मेरे काम का नहीं है क्योंकि एक भी पदक भारत के लिये नहीं है.” दौड़ने का जुनून उनकी रगों में लहू बनकर बहता था. उन्होंने कहा था, ”मैं जब तक दौड़ न लगा लूं, तब तक सेहत अच्छी नहीं लगती.” 2015 में उस समय 104 साल के रहे फौजा ने उम्र के इस पड़ाव पर भी अपनी तंदुरूस्ती का राज खोलते हुए कहा था,”मैं तंदरुस्त और पूरी तरह फिट हूं, इसका मूल कारण है -पिन्नी और दिली खुशी. मैं हमेशा खुश रहता हूं और रोज पंजाबी ‘पिन्नी’ खाता हूं.” उन्होंने बताया था, ”पिन्नी खाने के बाद मैं एक गिलास गुनगुना पानी पीता हूं. रात में सोने से पहले एक गिलास दूध और हर मौसम में खाने में दही जरूर खाता हूं. यहां (भारत में) या वहां (ब्रिटेन) मैं कहीं भी रहूं, मैं ये चीजें जरूर खाता हूं और हमेशा प्रसन्न रहता हूं. यही मेरी तंदुरुस्ती का सबसे बड़ा राज है.” उम्र के आठवें दशक के पूर्वार्द्ध में दौड़ शुरू करने वाले फौजा ने कहा था, ”पिन्नी के बगैर मैं एक दिन भी नहीं रह सकता. मुझे रोज चाहिये. लेकिन अब पंजाब आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गया है और यहां पिन्नी नहीं मिल रही है, जिसके लिये यह सबसे अधिक मशहूर है.”

विभिन्न देशों में मैराथन दौड़ लगा चुके फौजा का कहना था, ”यहां से अच्छी पिन्नी तो इंग्लैंड में मिलती है. वह ठंडा मुल्क है. वहां रहने वाले पंजाब के लोग भी पिन्नी पसंद करते हैं. ये जल्दी हजम हो जाती है.” उन्होंने ‘भाषा’ संवाददाता को भी फिटनेस नसीहत देते हुए कहा था,” काके! जे तुस्सी भी फिट रहणा चांहदे हो तो रोज पिन्नी खाया करो.” ‘पिन्नी’ एक अत्यंत लोकप्रिय पंजाबी मिठाई है जो घी, गेंहू के आटे, गोंद और सूखे मेवों से बनायी जाती है.

हांग कांग में 2012 में हाफ मैराथन के बाद 2012 में दौड़ से सन्यास लेने वाले फौजा सिंह ने बताया था, ” 100 साल की उम्र हो जाने के बाद मैराथन में मौका नहीं मिलता . कई बार दौड़ने के दौरान गिरने का भी डर लगा रहता है.” उम्र के आठवें दशक में दौड़ की ओर आर्किषत होने का कारण बताते हुए फौजा सिंह ने कहा था, ”तकरीबन 22 साल पहले मेरे बड़े बेटे की मौत सड़क हादसे में हो गयी थी. बेटे की जुदाई से मैं इतना गमज.दा हो गया था कि तकरीबन निष्प्राण हो चुका था. इसी बीच मेरी बेटी अपने साथ मुझे लंदन ले गयी. मेरा एक बेटा भी वहीं रहता है.” अप्रैल 2015 में 104 साल के होने वाले धावक फौजा सिंह ने बताया था ”लंदन में रहने वाले बठिंडा निवासी अमरीक सिंह ढिल्लों ने मुझे चैरिटी के लिये पहली बार दौड़ने को प्रेरित किया, इसके बाद एक बार दौड़ लगायी और फिर लगातार दौड़ रहा हूं.” उन्होंने कहा था, ”बेटे की मौत के बाद मैं डिप्रेशन में चला गया था. वहां मैं पार्क में ही बैठा रहता था. इसी दौरान अमरीक से मेरी मुलाकात हुयी और उन्होंने दौड़ने के लिये कहा.”

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