Sawan Somwar 2025: शिवालयों में जलाभिषेक के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हर-हर महादेव की गूंज

Author: navabharat digital
UPDATED: Mon, 21 Jul 2025 11:54 AM
Sawan Somwar 2025: शिवालयों में जलाभिषेक के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हर-हर महादेव की गूंज
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देहरादून:सुबह से लगातार बारिश के बीच शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी है। भोलनाथ के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद खास होता है। उत्तराखंड में महादेव के कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां आज खासतौर पर भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

ब्रह्मा पुत्र दक्ष की प्राचीन राजधानी कनखल, वह पुण्य भूमि जिस पर दक्ष ने विराट यज्ञ का आयोजन किया और भगवती सती ने अपमान की ज्वाला में जलकर अपनी आहुति दी। यज्ञ के समय इस भूमि पर विष्णु, ब्रह्मा, 84 हजार ऋषियों और असंख्य देवताओं के चरण पड़े।

महादेव तो दक्ष सुता सती को ब्याहने के लिए यक्ष गंधर्वों और किन्नरों के साथ आए थे। अब श्रावण में वचन निभाने दक्षेश्वर बनकर आते हैं। यह वही भूमि है जिसने देश की 52 शक्तिपीठों के निर्माण का इतिहास रचा है। इसी भूमि पर ऋषियों ने स्वर्ग से इतर पहली बार अरणी मंथन से यज्ञग्नि उत्पन्न की थी। भगवती की मायानगरी कनखल का शिवत्व केंद्र आकाश में है तो महामाया का शक्तिपूज पाताल में। इन्हीं शक्ति केंद्रों की डोर से ब्रह्मांड बंधा है।

अनादि देव ब्रह्मा पुत्र राजा दक्ष की अनोखी नगरी है कनखल। इसी पुण्य भूमि शिव दक्ष सुता सती को ब्याहने तो आए पर दक्ष के जीवित रहते फिर दोबारा नहीं आए। इसी पावन भूमि पर ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, नारद आदि देवों की साक्षी में दिग्दिगंत से आए 84000 ऋषियों ने अरणी मंथन से यज्ञाग्नि उत्पन्न की थी। यहां शिवत्व भी है, देवत्व भी और महामाया का अपार शक्तिपुंज भी। दक्ष को दिया वचन निभाते हुए भगवान शंकर अब प्रत्येक सावन कनखल में दक्षेश्वर बन कर विराजते हैं।

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