सरकार ने ‘ईंट का जवाब पत्थर’ से नहीं दिया : तृणमूल कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 29 Jul 2025 08:34 PM
सरकार ने ‘ईंट का जवाब पत्थर’ से नहीं दिया : तृणमूल कांग्रेस
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नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र पर पहलगाम हमले के बाद चलाये गये ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ न देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने का मौका चूक गई.
तृणमूल कांग्रेस की सयानी घोष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में विशेष चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस अभियान से देश की भावनाएं उफान पर थीं, लेकिन एक फैसले (संघर्ष विराम) ने सब पर पानी फेर दिया.

घोष ने कहा कि आतंकवादियों ने पहलगाम में धर्म पूछकर हमारी बहनों के सुहाग छीने और सरकार ने इसका बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. उन्होंने कहा, ”इसके बाद भावनाएं हिलोरें मार रही थीं, लेकिन एक फैसले ने सब पर पानी फेर दिया.” घोष ने कहा कि देश को यह उम्मीद थी कि पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा, लेकिन ईंट का जवाब ईंट से ही दिया गया, पत्थर से नहीं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह बताने का समय था कि उसके झंडे में चांद है, लेकिन हमारा झंडा चांद पर है.

उन्होंने कहा, ”आपके यहां (पाकिस्तान में) एक किलो आटे के लिए आपस में लड़ाई होती है, जबकि हमारे यहां गुरुद्वारे में पूड़ी और हलवा बांटा जाता है.” परीक्षा में पेंसिल टूटने जैसी बातों को नजरंदाज करके इसके परिणाम की समीक्षा करने संबंधी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को लेकर कटाक्ष करते हुए तृणमूल सांसद ने कहा कि परीक्षा का परिणाम जो भी हुआ हो, लेकिन ‘पेपर लीक’ करा दिया गया.

उनका इशारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर था, जिन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का श्रेय लिया था और अब भी वह गाहे-बगाहे यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच युद्धविराम कराया था. घोष ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया यदि किसी ने सरकार की हां में हां मिला लिया तो वह देशभक्त और यदि कोई सवाल पूछ ले तो वह देशद्रोही करार दिया जाता है.

‘विश्वगुरु’ ने अपने ही देश के लोगों को निराश किया : कनिमोई का प्रधानमंत्री मोदी पर तंज

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सांसद कनिमोई ने पहलगाम हमले को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ”विश्वगुरु” ने अपने ही देश के लोगों को निराश किया है. द्रमुक सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देने के लिए विश्व के विभिन्न देशों में भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में विपक्षी दलों के सांसदों को शामिल करने के लिए सरकार को धन्यवाद दिया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अवसरों का जश्न मनाने के बजाय शोक मनाने की जरूरत होती है.

कनिमोई ने कहा, ”पहली बार, भाजपा ने विपक्ष पर थोड़ा भरोसा दिखाया और हमें देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रतिनिधिमंडलों के हिस्से के रूप में भेजा. मैं उनका धन्यवाद करना चाहती हूं, लेकिन मैं यह भी कहना चाहूंगी कि अगर इन प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करने का अवसर नहीं मिलता, तो हम कहीं अधिक खुश और आभारी होते.” कनिमोई ने कहा, ”इन प्रतिनिधिमंडलों को क्यों जाना पड़ा, हमले क्यों हुए…कुछ अवसर जश्न मनाने के लिए नहीं, बल्कि शोक मनाने के लिए होते हैं…यह नौबत इसलिए आई क्योंकि शांति भंग हुई….” उन्होंने कहा, ”हमें जाना पड़ा, क्योंकि आपने भारत के लोगों को निराश किया. विश्वगुरु ने हमें निराश किया है…आज यह दोषारोपण का खेल बन गया है. आज भी, गृहमंत्री ने अपने भाषण में केवल विपक्ष को दोष देने पर ध्यान केंद्रित किया.” भाजपा भारत को ”विश्वगुरु” के रूप में देखती है, वहीं विपक्ष अक्सर इस शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर कटाक्ष करने के लिए करता है.

द्रमुक सांसद ने सवाल किया कि अगर भारत वास्तव में ”विश्वगुरु” है तो आतंकवादी हमले क्यों होते रहते हैं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें आतंकवादियों ने लोगों की जान ली थी. कनिमोई ने कहा कि मई 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में आतंकवादियों ने नौ तीर्थयात्रियों की हत्या कर दी थी. उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 में एक और हमला हुआ और नवंबर 2024 तथा अप्रैल 2025 में क्रमश: श्रीनगर और पहलगाम में हमले हुए.

उन्होंने कहा, ”पुलवामा में वे 240 किलोग्राम आरडीएक्स (विस्फोटक पदार्थ) लेकर आए, हमारे पास कोई जवाब नहीं है. हर बार जब कोई हमला होता है, तो आप कहते हैं कि यह दोबारा नहीं होगा, लेकिन विश्वगुरु ने क्या सीखा? जब ‘रॉ’ (भारत की गुप्तचर एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) और ‘आईबी’ (इंटेलीजेंस ब्यूरो) ने कहा था कि संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं और आतंकवादी ‘रेकी’ कर रहे हैं, सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की? किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया….” उन्होंने सवाल किया कि देश के लोगों की सुरक्षा के लिए कौन जिम्मेदार है, आप (केंद्र) नाकाम क्यों हुए, आपने जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया लेकिन बजट में कटौती कर दी.

उन्होंने जम्मू कश्मीर के पर्यटन पर निर्भर रहने का हवाला देते हुए कहा कि पहलगाम हमले के बाद होटलों के 13 लाख बुकिंग रद्द हो गए. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का दो देशों ने समर्थन किया, लेकिन ”हमारे समर्थन में क्या कोई देश खुलकर सामने आया और हमारा समर्थन किया?” उन्होंने कहा, ”आपकी यह कैसी विदेश नीति है कि हमारा ऐसा कोई दोस्त नहीं है, जो खुलकर सामने आये और आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश (पाकिस्तान) की निंदा करे. क्या आप कूटनीति में नाकाम हो गए.” उन्होंने कहा, ”यह सरकार एक ‘एक्सटेंशन’ सरकार है क्योंकि सभी अधिकारी एक्सटेंशन पर नियुक्त अधिकारी हैं, चाहे वह रॉ, आईबी, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) हो, सब (में शीर्ष अधिकारी) एक्सटेंशन पर हैं.”

ऑपरेशन सिंदूर के बाद कितने देशों ने भारत की कार्रवाई को समर्थन दिया : द्रमुक

द्रविड़ मुनेत्र कषगम के एक सदस्य ने राज्यसभा में सरकार से सवाल पूछा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद कितने देशों ने भारत की कार्रवाई को समर्थन दिया. राज्यसभा में द्रमुक के नेता तिरुचि शिवा ने ”पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा” में हिस्सा लेते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों के प्रतिनिधिमंडलों को दूसरे देशों में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रुख और भारत की कार्रवाई के बारे में बताने के लिए भेजा था.

उन्होंने कहा ”हमें यह जानना है कि कितने देशों में भारत की कार्रवाई को समर्थन दिया ? आज कितने देश भारत के साथ खड़े हैं ?” शिवा ने कहा कि राजनीतिक दलों ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सारे मतभेद भुला कर सरकार को समर्थन दिया. उन्होंने कहा,” हमें यह जानने का हक है कि आखिर वह कैसी खुफिया नाकामी थी जिसके चलते 26 बेकसूर लोगों को पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछ-पूछ कर क्रूरता के साथ मौत के घाट उतार दिया”.

उन्होंने कहा ”पर्यटकों को उच्च सुरक्षा वाले हिस्से में कैसे जाने दिया गया ? वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे ? इन सवालों के जवाब कौन देगा ?” उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद वहां के हालात में सुधार होने के दावों पर पहलगाम हमला सवाल उठाता है.

शिवा ने कहा कि रक्षा मंत्री ने कहा है कि परीक्षा के बाद परिणाम देखना चाहिए, न कि यह देखना चाहिए कि किसकी पेंसिल टूटी या पेन टूटा. उन्होंने कहा ”यह देश की रक्षा से, उसकी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. आतंकवादी आए दिन बेकसूर लोगों की जान लेते हैं. हमें इसे हल्के में नहीं ले सकते.” उन्होंने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने पर कहा कि यह समस्या का सही समाधान नहीं है क्योंकि आम नागरिकों को निशाना बनाया जाना उचित नहीं है.

द्रमुक सदस्य ने कहा कि संसद में विपक्षी सदस्यों के सवाल उठाने पर और अपनी बात रखने पर सत्ता पक्ष के सदस्य जिस तरह व्यवधान डालते हैं, वह ठीक नहीं है. ”क्या यह स्वस्थ लोकतंत्र है ? सबसे पहले तो बोलने ही नहीं दिया जाता. बोलने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता.” उन्होंने कहा कि चीन की ओर से सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि चीन एक विस्तारवादी देश है और भारत की जमीन का एक हिस्सा अब तक उसके कब्जे में है.

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