जेन-जेड युवाओं को दीर्घकालिक नौकरी नहीं, वेतन, लचीलापन एवं मकसद की चाह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 05 Nov 2025 08:54 PM
जेन-जेड युवाओं को दीर्घकालिक नौकरी नहीं, वेतन, लचीलापन एवं मकसद की चाह
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नयी दिल्ली. भारत के युवा पेशेवर अब अपने करियर के फैसले केवल वेतन के आधार पर नहीं, बल्कि लचीलापन, कामकाज एवं निजी जिंदगी में संतुलन और उद्देश्य जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर ले रहे हैं. बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई. रैंडस्टैड इंडिया की रिपोर्ट ‘द जेन-जेड वर्कप्लेस ब्लूप्रिंट’ कहती है कि 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा यानी ‘जेन-जेड’ लंबी अवधि वाली पारंपरिक नौकरियों में कम रुचि दिखा रहे हैं और व्यक्तिगत मूल्यों से मेल खाने वाले अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर वेतन, कामकाज के लचीले घंटे और निजी जिंदगी एवं काम के बीच संतुलन इस युवा पीढ.ी के लिए प्रमुख प्रेरक हैं. वहीं, अतिरिक्त छुट्टी या पारंपरिक सुविधाओं की तुलना में विदेश में दूरस्थ रूप से काम करने और यात्रा के अवसर उन्हें अधिक लुभाते हैं.

रैंडस्टैड इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्वनाथ पीएस ने कहा, “वे नियोक्ता जो आजीवन सीखने, समावेशी संस्कृति और लचीली नीतियों को अपनाएंगे, वे न केवल जेन-जेड युवाओं को आर्किषत करेंगे बल्कि भविष्य के लिए मजबूत व्यवसाय भी तैयार करेंगे.” रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जेन-जेड पीढ.ी का बड़ा हिस्सा ‘पूर्णकालिक नौकरी के साथ में कुछ अन्य काम’ करने को प्राथमिकता देता है.

रैंडस्टैड डिजिटल इंडिया के प्रबंध निदेशक मिलिंद शाह ने कहा कि इस प्रवृत्ति को लेकर अनुकूल रवैया रखने वाली प्रौद्योगिकी कंपनियां ही नई पीढ.ी की प्रतिभाओं को आर्किषत कर पाएंगी. कृत्रिम मेधा (एआई) के संदर्भ में यह रिपोर्ट कहती है कि 82 प्रतिशत जेन-जेड पेशेवर इसे लेकर उत्साहित हैं और 83 प्रतिशत इसका इस्तेमाल समस्या समाधान के लिए कर रहे हैं. हालांकि, 44 प्रतिशत युवा इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि आगे चलकर एआई उनकी नौकरियों को प्रभावित कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, जेन-जेड के लिए नौकरी की अवधि नहीं, बल्कि उसमें मिलने वाली वृद्धि और सम्मान अधिक महत्वपूर्ण है. यह बदलाव कंपनियों के लिए एक अवसर है कि वे अपने कार्यस्थल की संस्कृति और प्रतिभा रणनीतियों को समय के अनुरूप ढालें.

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