Israel Election Result: नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से दूर, लिकुड 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, राष्ट्रपति हर्जोग तय करेंगे सरकार बनाने का मौका

इस्राइल चुनाव नतीजे
Author: www.navabharat.news
UPDATED: Fri, 30 Oct 2026 10:47 AM
Israel Election Result: नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से दूर, लिकुड 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, राष्ट्रपति हर्जोग तय करेंगे सरकार बनाने का मौका
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यरूशलम। इस्राइल के आम चुनाव के अंतिम नतीजों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत से दूर रह गया है। केंद्रीय चुनाव समिति ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अंतिम नतीजे जारी कर दिए, जिससे 26वीं नेसेट (इस्राइली संसद) में सभी दलों की सीटों की स्थिति साफ हो गई है। नई संसद का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होगा। सरकार बनाने के लिए अब दलों के बीच जोड़तोड़ शुरू हो गई है और राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की भूमिका अहम होगी।

किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?

‘द टाइम्स ऑफ इस्राइल’ की रिपोर्ट के मुताबिक:

पार्टी सीटें
लिकुड (नेतन्याहू) 27
याशर (गादी आइसेनकोट) 21
बी’याचाद 12
जॉइंट लिस्ट 11
डेमोक्रेट्स 8
रा’अम (अरब समर्थित) 8
इस्राइल बेतेनु 7
यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म 7
ओत्ज्मा येहुदित 7
शस 6
रिलीजियस जियोनिज्म 6

तीन गुटों में बंटा जनादेश

अंतिम नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू का समर्थन करने वाले दलों के पास कुल 53 सीटें हैं, जबकि विरोधी खेमे को 48 सीटें मिली हैं। अरब दलों के पास 19 सीटें हैं। इस तरह किसी भी गुट के पास अपने दम पर सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं है। चुनाव में कुल 77.9 फीसदी मतदान हुआ और 57,16,665 पात्र मतदाताओं ने वोट डाला।

छोटी पार्टियां दौड़ से बाहर

इस्राइल में संसद में सीट पाने के लिए कम से कम 3.25 फीसदी वोट जरूरी होते हैं। द रिजर्विसिस्ट्स को 2.7 फीसदी, पीपल ऑफ इस्राइल को 1.7 फीसदी और चरेदी पब्लिक को सिर्फ 0.2 फीसदी वोट मिले, इसलिए ये दल संसद में जगह नहीं बना सके। चुनाव समिति किसी संभावित गड़बड़ी या शिकायत की जांच के बाद 4 नवंबर को अंतिम आधिकारिक नतीजे राष्ट्रपति हर्जोग को सौंपेगी।

राष्ट्रपति हर्जोग तय करेंगे किसे मिले मौका

अंतिम नतीजे मिलने के बाद राष्ट्रपति हर्जोग सभी दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वे उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे ज्यादा संभावना होगी। अगर पहला नेता तय समय में नाकाम रहता है, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे नेता को जिम्मेदारी दे सकते हैं। अगर कोई भी बहुमत नहीं जुटा पाता, तो इस्राइल को एक बार फिर चुनाव का सामना करना पड़ सकता है।

अरब दलों के समर्थन से भी राह आसान नहीं

अरब दलों की 19 सीटें सरकार बनाने का गणित बदल सकती हैं। हालांकि, रा’अम प्रमुख मंसूर अब्बास को नहीं लगता कि अरब दलों के बाहरी समर्थन से विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट आसानी से सरकार बना पाएंगे। ‘चैनल 12 न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्बास ने पार्टी नेताओं की बैठक में कहा कि अरब दलों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने का रास्ता काफी मुश्किल है। विपक्षी दलों को आपस में भी सहमति बनानी होगी, और फिलहाल अरब बहुल दलों को साथ लेने पर केवल डेमोक्रेट्स ने खुलकर सहमति जताई है।

क्या बन सकती है नेतन्याहू और विपक्ष की मिली-जुली सरकार?

एक विकल्प यह है कि नेतन्याहू की लिकुड और विपक्ष के कुछ दल, जैसे गादी आइसेनकोट की याशर, नफ्ताली बेनेट का टुगेदर मूवमेंट और एविग्डोर लिबरमैन की इस्राइल बेतेनु, साथ आ जाएं। इससे 66 सीटों वाली सरकार का गणित बन सकता है। हालांकि, यह राह आसान नहीं दिखती, क्योंकि विपक्षी दलों ने प्रचार के दौरान नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का वादा किया था। दूसरी ओर, नेतन्याहू भी अपने कट्टर दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी सहयोगियों पर निर्भर हैं।

विदेशी दखल के आरोपों की जांच

चुनाव के दौरान वोटिंग में गड़बड़ी और विदेशी ताकतों के दखल को लेकर भी विवाद उठा। केंद्रीय चुनाव समिति के चेयरमैन नोम सोहलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख डेविड ज़िनी से जांच करने को कहा है। मुख्य मुद्दा यह है कि क्या किसी विदेशी ताकत ने अरब समुदाय के मतदान रुझान को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि, चुनाव समिति का कहना है कि बड़े स्तर पर छेड़छाड़ के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

फिलहाल सबकी नजर राष्ट्रपति हर्जोग के अगले कदम पर है। नेतन्याहू के पास सबसे बड़ी पार्टी होने का फायदा है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा दूर है। आने वाले दिनों में दलों के बीच होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि इस्राइल को नई सरकार मिलेगी या फिर चुनाव की नौबत आएगी।

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