भुवनेश्वर. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए उनके व्यवहार की तुलना उपद्रवियों और आतंकियों जैसी मानसिकता से की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियां और विरोध प्रदर्शन का तरीका लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
डॉ त्रिवेदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के परिसर में विपक्षी नेताओं के प्रवेश, प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन और सर्वोच्च न्यायालय से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया।
मर्यादा बनाए रखना आवश्यक
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और सार्वजनिक व्यवस्था के प्रति मर्यादा बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राहुल गांधी के गले मिलने के बाद सदन में किए गए इशारों का भी उल्लेख किया और कहा कि इस तरह के आचरण से राजनीतिक गंभीरता पर सवाल उठते हैं।
कभी सुप्रीम कोर्ट तो कभी प्रधानमंत्री आवास के समक्ष प्रदर्शन करने की कोशिश कांग्रेस की राजनीतिक सोच और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
युवराज की गतिविधियां अब हो रही हैं विचित्र और विक्षिप्त
सोमवार को भुवनेश्वर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस के युवराज की गतिविधियां अब विचित्र और विक्षिप्त होती जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में असहमति जताने और विरोध दर्ज कराने का यही तरीका रह गया है? संवैधानिक संस्थाओं और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों के सामने प्रदर्शन करके राजनीतिक संदेश देने की कोशिश आखिर किस मानसिकता को दर्शाती है?
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की व्यवस्था भी है। यदि किसी प्रक्रिया में आपत्ति है तो उसके समाधान के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक रास्ते उपलब्ध हैं। सड़कों पर टकराव और संस्थाओं के सामने प्रदर्शन को राजनीतिक हथियार बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर के मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। विपक्ष को मतदाता सूची की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के बजाय पारदर्शी प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।
चक्रवात अर्णव से प्रभावित लोगों के लिए पैकेज की घोषणा
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात ‘अर्णव’ से प्रभावित लोगों के लिए व्यापक राहत एवं पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के तहत किसानों, मकान क्षति झेलने वाले परिवारों, पशुपालकों, मछुआरों, महिला स्वयं सहायता समूहों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 किलोग्राम चावल के साथ 2,500 रुपये की अनुग्रह सहायता भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने शनिवार देर शाम विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) के कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में चक्रवात अर्णव के प्रभाव, राहत एवं बचाव कार्यों, पुनर्निर्माण तथा नुकसान के आकलन की समीक्षा करने के बाद यह घोषणा की।
बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य सचिव अनु गर्ग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद पाढ़ी तथा विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चक्रवात से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी स्थिति पर चर्चा की गई है।
उन्होंने जानकारी दी कि 2 नवंबर को केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी समिति ओडिशा का दौरा करेगी। समिति विशेष रूप से चक्रवात से सर्वाधिक प्रभावित गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में हुए नुकसान का आकलन करेगी।
चक्रवात ‘मुरासु’ की आशंका, राहत टीमें तैनात रहेंगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि चक्रवात अर्णव का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और एक अन्य संभावित चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ को लेकर भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
उन्होंने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में सरकारी राहत एवं निगरानी टीमें पहले से तैनात हैं, वे वहीं बनी रहेंगी और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संभावित नए मौसम संबंधी खतरे को देखते हुए राहत एवं निगरानी व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
किसानों को प्रति हेक्टेयर 22,500 रुपये तक सहायता
कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने विशेष सहायता की घोषणा की है। 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर तक इनपुट सब्सिडी दी जाएगी।
सहायता की दरें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं:
· असिंचित भूमि के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
· सिंचित भूमि के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर।
· बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर।
इसके अलावा न्यूनतम इनपुट सहायता के तहत बारहमासी फसलों के लिए 2,500 रुपये, सिंचित भूमि के लिए 2,000 रुपये तथा असिंचित भूमि के लिए 1,000 रुपये दिए जाएंगे।
जिन खेतों में बालू या गाद जमा हो गई है, वहां से उसे हटाने के लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाएगी। प्रत्येक प्रभावित किसान को न्यूनतम 2,200 रुपये मिलेंगे।
किसानों को आगामी फसल के लिए 1.20 लाख दलहन मिनीकिट, 5,000 तिलहन किट और 50,000 सब्जी बीज किट उपलब्ध कराए जाएंगे। इस प्रकार कुल 1.75 लाख विशेष मिनीकिट वितरित किए जाएंगे।
गन्ने की खेती वाले प्रभावित 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष सहायता दी जाएगी। स्पेस ट्रांसप्लांटिंग पद्धति के प्रदर्शन के लिए 27,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा रैटून फसल प्रबंधन के लिए 12,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान किया गया है।
वर्ष 2026-27 के रबी मौसम में कीटनाशकों और जैविक कीटनाशकों की खरीद पर 75 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी।
कृषि ऋण के पुनर्गठन की व्यवस्था
33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान वाले क्षेत्रों में इच्छुक किसानों के अल्पकालीन खरीफ कृषि ऋण को मध्यम अवधि के ऋण में परिवर्तित किया जाएगा।
इसके अलावा भूमिहीन किसानों, बटाईदारों और मौखिक समझौतों के आधार पर खेती करने वाले किसानों को रबी मौसम में ऋण उपलब्ध कराने के लिए संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) गठित किए जाएंगे।
मकान क्षति पर 1.30 लाख रुपये तक सहायता
मुख्यमंत्री ने सौम्याश्री थनापति को दी बधाई
भुवनेश्वर। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी 2026 में प्रथम स्थान हासिल कर ओडिशा को गौरवान्वित करने वाली बलांगीर जिले के झारमुंडा स्थित ओडिशा आदर्श विद्यालय की दसवीं कक्षा की छात्रा सौम्याश्री थनापति को मुख्यमंत्री ने बधाई दी है।
मुख्यमंत्री ने सौम्याश्री की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सफलता पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि ओडिशा के असंख्य विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने सौम्याश्री के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की कामना भी की।