जकार्ता. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) के सदस्यों से आतंकवाद के मुद्दे पर ‘एकरूप, एकजुट और कतई बर्दाश्त’ नहीं करने का रूख अपनाने की शुक्रवार को अपील की. विदेश मंत्री के इस बयान को पाकिस्तान के परोक्ष संदर्भ में देखा जा रहा है.
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आसियान क्षेत्रीय मंच की मंत्रीस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देकर और आतंकवाद से मुकाबला करके वैश्विक चुनौतियों पर प्रतिक्रिया दे रहा है. विदेश मंत्री ने ट्वीट किया, ” आतंकवाद पर एआरएफ सदस्यों को एकरूप, एकजुट और कतई बर्दाश्त नहीं करने का रूख अपनाना चाहिए. इसमें इसके पनाहगाहों एवं वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करना तथा सीमापार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों से मुकाबला करना शामिल है.” भारत, पाकिस्तान पर उसकी धरती से पनपने वाले सीमापार आतंकवाद को रोकने की खातिर कदम उठाने के लिए दबाव देता रहा है.
विदेश मंत्री जयशंकर आसियान के तहत विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने इंडोनेशिया में हैं, जिसका प्रारूप आसियान-भारत, पूर्वी एशिया शिखर बैठक और आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) है. जयशंकर ने आर्थिक लचीलेपन के लिए आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण और ‘वैश्विक दक्षिण’ की मदद के लिए संसाधनों तक पहुंच को बढ़ाने की वकालत की. विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में तीन विषयों नौवहन मामलों, म्यांमा और आतंकवाद पर ध्यान केंद्रित किया. नौवहन मुद्दों पर जयशंकर ने ”यूएनसीएलओएस 1982” की प्रमुखता और आसियान के रूख के समर्थन पर जोर दिया .
उन्होंने कहा, ” हम शांति एवं स्थिरता को कमतर करने की गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं. कोई आचार संहिता तीसरे पक्ष के हितों एवं अधिकारों को लेकर पूर्वाग्रहपूर्ण नहीं हो.” इस बयान को चीन के परोक्ष संदर्भ में देखा जा रहा है जिसका इस क्षेत्र के कई देशों के साथ समुद्र संबंधी विवाद है. चीन लगभग सम्पूर्ण विवादित दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है. हालांकि ताइवान, फिलिपीन, ब्रूनेई, मलेशिया, वियतनाम सभी का इसके हिस्सों पर दावा है. म्यांमा के बारे में जयशंकर ने कहा कि भारत, आसियान के विचारों को ध्यान में रखेगा और भारत-आसियान सम्पर्क परियोजनाओं को आगे बढ़ायेगा.
जयशंकर ने जकार्ता में चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी से मुलाकात की
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को यहां शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी से मुलाकात की और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता से संबंधित लंबित मुद्दों पर चर्चा की. यह बैठक यहां आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) की मंत्रिस्तरीय बैठक के इतर हुई. जयशंकर ने ट्वीट किया, ”विदेश मामलों के लिए सीपीसी केंद्रीय आयोग के कार्यालय निदेशक वांग यी के साथ एक बैठक की.” जयशंकर ने कहा कि उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति से संबंधित लंबित मुद्दों पर चर्चा की.
उन्होंने कहा, ”हमारी बातचीत में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन/एआरएफ एजेंडा, ब्रिक्स और हिंद-प्रशांत क्षेत्र भी शामिल था.” भारत का लगभग तीन साल से चीन के साथ सैन्य गतिरोध बना हुआ है. जयशंकर ने दावा किया है कि यह उनके लंबे राजनयिक करियर की सबसे जटिल चुनौती है. चीन के पूर्व विदेश मंत्री वांग मौजूदा विदेश मंत्री किन गैंग के अस्वस्थ होने के कारण जकार्ता में आसियान बैठकों में भाग ले रहे हैं.