तिरुवनंतपुरम/कोच्चि. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को आरोप लगाया कि केरल में हाल ही में पार्टी में शामिल हुए ईसाई समुदाय के सदस्यों को कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के समर्थकों द्वारा ऑनलाइन निशाना बनाया जा रहा है. भाजपा राज्य में केरल में कुछ समय से ईसाई समुदाय को लुभाने में लगी है. भाजपा ने ईसाइयों को निशाना बनाए जाने में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले राज्य में ईसाई समुदाय का एक पादरी और करीब 50 परिवार भाजपा में शामिल हुए. भाजपा के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि पार्टी में शामिल होने के बाद से ईसाई समुदाय के सदस्यों को ”ऑनलाइन निशाना” बनाया जा रहा है.
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने संवाददाताओं से कहा, ”हम किसी भी कीमत पर उनकी रक्षा करेंगे. हम उनके खिलाफ कोई भी कदम उठाने वालों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे. कड़ा जवाब दिया जाएगा.” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदाय का पार्टी में शामिल होना कांग्रेस और माकपा को बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है.
सुरेंद्रन ने कहा कि भाजपा में शामिल होने वाले पादरी समेत अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को धमकाया गया है. उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से अपमानित करने और व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
भाजपा ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि दक्षिणी केरल के पत्तनमतिट्टा जिले में ऑर्थोडॉक्स चर्च निलाक्कल भद्रसानम के सचिव फादर शैजू कुरियन समेत करीब 50 ईसाई परिवार शनिवार को केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए.
पार्टी ने कहा कि केरल कांग्रेस (जैकब) गुट के कई लोग भी शनिवार को मध्य केरल के त्रिशूर जिले में प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हो गए.
भाजपा ने अल्पसंख्यकों के अपने खेमे में शामिल होने का श्रेय नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के नेतृत्व में विकास के दूरदर्शी दृष्टिकोण को दिया. इसने कहा, ”पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने विकास के प्रति मजबूत समर्पण दिखाया है. यह अल्पसंख्यकों को भाजपा का समर्थन करने और पार्टी में शामिल करने के लिए प्रेरित करने की प्रमुख वजह है.” यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब भाजपा ने राज्य में ईसाई समुदाय को जोड़ने के मकसद से अपनी ‘स्नेह यात्रा’ फिर से शुरू कर दी है.
भाजपा ने कहा, “भाजपा स्नेह यात्रा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अल्पसंख्यक समूहों के बीच गलतफहमियों को दूर कर सकती है. यह निश्चित है कि विकास की राजनीति का हिस्सा बनने के लिए आने वाले दिनों में और अधिक लोग भाजपा में शामिल होंगे.” घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि “संघ परिवार एक आंदोलन है जो पूरे भारत में ईसाइयों को निशाना बनाता है.”
विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा “भेड़ के भेष में भेड़िये की तरह है, जो ईसाई घरों में घुसपैठ कर रहा है.” उन्होंने कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि केरल के ईसाइयों के पास अपने असली इरादों को पहचानने की बुद्धिमत्ता है. सतीशन ने कहा कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्ष रुख अपनाए हुए है और कर्नाटक में भी यही रुख है.
पिछले सप्ताह स्नेह यात्रा बहाल करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य के विभिन्न गिरजाघरों के शीर्ष पादरियों से मुलाकात की थी और उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से क्रिसमस की बधाई दी थी. हाल में विभिन्न गिरजाघरों के कई वरिष्ठ बिशप ने कई मौकों पर भाजपा के समर्थन में बयान दिए हैं लेकिन मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कथित चुप्पी को लेकर उनके बीच मतभेद भी पैदा हुए हैं. राज्य में कांग्रेस पार्टी ने ईसाई समुदाय तक पहुंचने की भाजपा की पहल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह ‘स्नेह यात्रा’ नहीं, बल्कि ”यीशु के साथ विश्वासघात” है.
कांग्रेस ने केरल में माकपा पर राम मंदिर संबंधी निमंत्रण पर विवाद पैदा करने का आरोप लगाया
कांग्रेस की केरल इकाई ने रविवार को आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ माकपा 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए कुछ कांग्रेस नेताओं को मिले निमंत्रण पर अनावश्यक रूप से विवाद पैदा कर रही है. यह टिप्पणी तब आई जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि कांग्रेस अनिर्णय की स्थिति में है और यह नहीं बता रही है कि निमंत्रण पाने वाले इसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी सहित प्रमुख नेता समारोह में शामिल होंगे या नहीं.
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने वाम दल पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे का इस्तेमाल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए कर रहा है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, “माकपा अयोध्या का राजनीतिकरण कर रही है. कांग्रेस को पार्टी के रूप में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया है. कुछ व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया है. पार्टी इस बारे में सोचेगी और इस पर निर्णय लेगी.” उन्होंने माकपा की आलोचना करते हुए कहा कि वह भाजपा की तरह ही जाति और धर्म के नाम पर समाज में विभाजन पैदा कर रही है.
इस मुद्दे पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) द्वारा अपनाए गए रुख की सराहना करते हुए सतीशन ने कहा कि उसने सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया दी है जिससे कि समाज में कोई विभाजन न हो. विपक्षी नेता ने केरल के मुसलमानों के बीच महत्वपूर्ण आधार वाले ‘समस्त केरल जेम-इय्याथुल उलमा’ के रुख की भी प्रशंसा की, जिसने कहा था कि समारोह में चाहे जो भी शामिल हो, समुदाय की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी.
सतीशन ने माकपा के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि यह शर्मनाक है कि वे चुनावी राजनीति के लिए ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस समारोह में अपने नेताओं के भाग लेने के मुद्दे पर सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श करेगी तथा निर्णय लेगी. सतीशन ने कहा कि अयोध्या मुद्दे पर सावधानी बरती जानी चाहिए.
माकपा पहले ही घोषणा कर चुकी है कि उसके प्रतिनिधि समारोह में शामिल नहीं होंगे. इसने इसे आम चुनाव से पहले भाजपा का राजनीतिक कदम बताया है. सतीशन ने कहा कि माकपा की उपस्थिति केवल केरल में है, जिससे पता चलता है कि उसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि भारत के अन्य हिस्सों में उसकी ज्यादा उपस्थिति नहीं है.