हैदराबाद/कोलकाता. संशोधित नागरिकता कानून-2019 के लिए नियमों को लोकसभा चुनाव की घोषणा से ‘बहुत पहले’ अधिसूचित किये जाने संबंधी केंद्र के बयान के एक दिन बाद बुधवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसे (संशोधित नागरिकता कानून)’असंवैधानिक’ करार दिया और कहा कि इसे धर्म के आधार पर बनाया गया है.
यहां संवाददाताओं से बातचीत में हैदराबाद के सांसद ने कहा, ”सीएए(संशोधित नागरिकता कानून) संविधान के विरुद्ध है. यह एक ऐसा कानून है जिसे धर्म के आधार पर बनाया गया है.”
उन्होंने कहा कि सीएए को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनसआरसी) के साथ पढ़ा और समझा जाना चाहिए जो इस देश की आपकी नागरिकता साबित करने के लिए शर्तें रखेगा, और अगर ऐसा होता है तो यह विशेष रूप से मुसलमानों, दलितों और धर्म-जाति से परे देश की गरीब जनता के साथ एक गंभीर अन्याय होगा.
वह सीएए नियमों को केंद्र द्वारा अधिसूचित किये जाने को लेकर किये गये सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे. ओवैसी ने कहा,”… आप धर्म और विशेष रूप से नागरिकता के आधार पर कानून नहीं बना सकते… कानून बनाने के लिए आपको एनपीआर-एनआरसी के साथ नागरिकता संशोधन अधिनियम को समझना होगा. आपको उन शर्तों को देखना होगा जो वहां जोड़ी गई हैं… यह एक बड़ी मुसीबत होगी.” औवेसी ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस के छह दिसंबर, 1992 को ‘कार सेवकों’ के बाबरी ढांचा गिराये जाने के दौरान वहां मौजूद रहने पर गर्व और खुशी महसूस करने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि क्या वह (फडणवीस) उपमुख्यमंत्री होने के नाते उकसा व भड़का नहीं रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि बंगाल में सीएए लागू नहीं होगा: भाजपा का पलटवार
लोकसभा चुनाव से पहले सीएए नियमों की अधिसूचना जारी होने की खबर को खारिज करते हुए पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि राज्य में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू नहीं होगा . उसने आरोप लगाया कि संसदीय चुनाव से पहले लोगों को गुमराह करने की मंशा से ऐसी अटकलें लगायी जा रही हैं.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को कहा था कि संशोधित नागरिकता कानून, 2019 के नियम लोकसभा चुनाव की घोषणा से ‘काफी पहले’ अधिसूचित किए जाएंगे. नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाये गये सीएए के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के उन गैर मुसलमान प्रवासियों– हिंदुओं, सिखों, जैनों, बौद्धों , पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी जो उत्पीड़न के चलते 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ गये थे.
तृणमूल की मंत्री शशि पांजा ने यह कहते हुए पार्टी के रूख को दृढ़ता से सामने रखा , ” हमारी पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में सीएए लागू नहीं होगा. जो लोग लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा वादा कर रहे हैं, वे लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.” उन्होंने कहा, ” उन्होंने कानून तो पारित कर दिया लेकिन वे अबतक नियम नहीं बना पाये. यह कुछ नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव से पहले जनसमूह को बेवकूफ बनाने की कोशिश है.”
सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकता को लेकर बनर्जी द्वारा उठायी गयी चिंता का जिक्र करते हुए पांजा ने कहा, ”जिन लोगों के पास पहले से नागरिकता है, उन्हें फिर आवेदन करने की जरूरत क्यों होगी? बंगाल में सीएए कभी लागू नहीं होगा.” पांजा के बयान पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सामिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस पर वोटबैंक राजनीति के चलते सीएए का विरोध करने का आरोप लगाया. पिछले सप्ताह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दोहराया था कि सीएए का क्रियान्वयन अपरिहार्य है क्योंकि यह देश का कानून है. कोलकाता में भाजपा की एक बैठक के दौरान शाह ने बनर्जी पर इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था.