हनुमान चालीसा के पाठ से ‘भूत-पिशाच’ दूर रहते हैं : तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष के संदर्भ में कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 12 Jan 2024 09:31 PM
हनुमान चालीसा के पाठ से ‘भूत-पिशाच’ दूर रहते हैं : तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष के संदर्भ में कहा
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पटना/गुवाहाटी/नयी दिल्ली. भाजपा नेता तेजस्वी सूर्या ने अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण अस्वीकार करने वाले विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को कहा कि हनुमान चालीसा के पाठ से ‘भूत पिशाच’ दूर रहते हैं. भाजपा की युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बेंगलुरु दक्षिण से सांसद सूर्या स्वामी विवेकानंद की जयंती पर यहां आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसे राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.

सूर्या ने कहा, ”मैंने बिहार में अपने एक कार्यकर्ता से पूछा कि उनकी राय में ‘घमंडिया’ (‘इंडिया’ गठबंधन के लिए अपमानजनक शब्द) के नेता 22 जनवरी के समारोह के निमंत्रण को क्यों अस्वीकार कर रहे हैं.” भारतीय जनता युवा मोर्चा के तत्वाधान में आयोजित ‘युवा समागम’ में उन्होंने कहा, ”कार्यकर्ता ने कहा कि क्योंकि भक्त ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे’ का जाप करते हैं.” इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में ठहाके गूंजने लगे. कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और नित्यानंद राय, स्थानीय सांसद रविशंकर प्रसाद और राज्य इकाई के अध्यक्ष सम्राट चौधरी जैसे कई वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हुए.

समारोह से इतर पत्रकारों से बात करते हुए प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी और लोकसभा में लोकसभा मे पार्टी अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी का 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले समारोह में शामिल नहीं होने का निर्णय ”विनाश काले विपरीत बुद्धि” का प्रतीक है.

उन्होंने दावा किया, ”यह कांग्रेस के लिए शर्मनाक है जो राम राज्य लाने का सपना देखने वाले महात्मा गांधी की विरासत की कसम खाती है. कांग्रेस को अपने पतन की सीमा का एहसास नहीं है. लोकसभा में कभी कांग्रेस 400 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करती थी, लेकिन अब यह पार्टी लगभग 50 सीटों पर सिमट गई है. आगामी चुनावों में पार्टी खुद को जनता का सामना करने में असमर्थ पाएगी.”

कांग्रेस के नेताओं में यदि जरा भी समझ होती तो वे अयोध्या समारोह का निमंत्रण स्वीकार कर लेते: सोनोवाल

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस के नेताओं में यदि जरा भी समझ और ”देश की जनता के प्रति समर्पण भाव होता” तो वे 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लेते. केंद्रीय जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेता समारोह में शामिल हो सकते थे और भगवान राम के प्रति सम्मान दिखा सकते थे.

उन्होंने यहां एक कार्यक्रम से इतर कहा, ”प्रत्येक भारतीय उस दिन (22 जनवरी) का बेसब्री से इंतजार कर रहा है क्योंकि यह एक ऐतिहासिक और अद्भुत क्षण होगा लेकिन कांग्रेस ने अपना आत्मविश्वास खो दिया है.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 22 जनवरी को राम मंदिर में होने जा रहे भगवान राम के बाल स्वरूप के विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे. कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, ”वे एक हजार यात्राएं कर सकते हैं लेकिन वे लोगों के दिलों में जगह नहीं बना सकते क्योंकि 60 साल के शासन की उनकी यात्रा के दौरान उनके पास कोई नीति या दिशा नहीं थी.” सोनोवाल ने कहा, ”वे किस न्याय की बात कर रहे हैं? क्या उन्होंने लोगों को न्याय दिया? उन्होंने देश और इसकी जनता के साथ अन्याय किया. पार्टी ने घोटालों और भ्रष्टाचार के जरिये देश के प्रशासनिक तंत्र को कमजोर कर दिया और 60 वर्ष तक लोगों को धोखा दिया.” उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी ओर लोगों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को स्वीकार कर लिया है और पार्टी को अपने दिलों में जगह दी है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साढ़े नौ वर्ष में ईमानदारी और समर्पण भाव के साथ देश की सेवा की है.

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एक ऐतिहासिक पल है: नकवी

पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बृहस्पतिवार को कहा कि अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाला राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह एक ऐतिहासिक पल है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नकवी को इस समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है.
उन्होंने एक बयान में कहा, ”तारीखी लम्हें, ऐतिहासिक पल का सौभाग्यशाली गवाह बनने का मुझे आमंत्रण मिला है.”

उच्चतम न्यायालय ने 2019 में एक ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था और हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले शहर में एक मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ का वैकल्पिक भूखंड मुहैया कराने का आदेश दिया था.
इसके परिणामस्वरूप, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू हुआ. आगामी 22 जनवरी को ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद रहेंगे.

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