नयी दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पूछताछ के लिए एक बार फिर पेश नहीं हुए और आरोप लगाया कि समन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के इशारे पर जारी किए गए हैं, जो विपक्ष की आवाज दबाना चाहते हैं.
केजरीवाल को ईडी ने बृहस्पतिवार को आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वह बुधवार को 10 दिवसीय विपश्यना ध्यान सत्र के लिए चले गए.
मुख्यमंत्री ने बुधवार को ईडी को भेजे जवाब में कहा कि समन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है उन्हें मामले में ”गवाह या संदिग्ध” के तौर पर या एक ”दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अथवा आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक” के रूप में बुलाया गया है. उन्होंने कहा कि ताजा समन 18 दिसंबर को जारी किया गया जिसे निश्चित रूप से रद्द, वापस लिया जाना चाहिए.
उन्होंने ईडी को भेजे अपने जवाब में कहा, ”आपके समन का समय इसके पीछे की मंशा, मेरे इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि मुझे भेजे जा रहे समन किसी उद्देश्य या तर्कसंगत मानदंड पर आधारित नहीं हैं बल्कि ये राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के इशारे पर अनावश्यक विचारों से प्रेरित हैं जो केंद्र में सत्तारूढ़ दल के विरोध की आवाज को चुप कराना चाहते हैं ताकि 2024 की शुरुआत से लेकर मध्य तक होने वाले संसदीय चुनावों से पहले अंतिम कुछ महीनों में सनसनीखेज खबरें बन सकें.” केजरीवाल की आम आदमी पार्टी विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है.
इससे पहले केजरीवाल को ईडी ने दो नवंबर को तलब किया था, लेकिन वह नोटिस को अवैध और राजनीति से प्रेरित बताते हुए पूछताछ में शामिल नहीं हुए थे. उन्होंने कहा कि ईडी ने उनके पिछले जवाब में उठाए गए मुद्दों का जवाब दिए बिना ही नया समन जारी कर दिया.
केजरीवाल ने अपने जवाब में कहा, ”ऐसी ही परिस्थितियों में जहां व्यक्तियों को न तो मामले के विवरण के बारे में सूचित किया जाता है और न ही प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें किस क्षमता से बुलाया जा रहा है इस बारे में सूचित किया जाता है, उच्च न्यायालयों ने ईडी के ऐसे समन को अमान्य घोषित कर दिया है और समन को रद्द किया है.” आप के राष्ट्रीय संयोजक ने जोर देकर कहा कि वह ”एक निर्वाचित नेता और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के मौजूदा मुख्यमंत्री के रूप में एक संवेदनशील संवैधानिक पद पर हैं”.
अपने जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना जीवन पारर्दिशता और ईमानदारी से गुजारा है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है. उन्होंने कहा कि वह किसी भी कानूनी समन को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से सभी को ज्ञात मेरे कार्यक्रम के अनुसार, 20.12.2023 से मैं विपश्यना ध्यान पाठ्यक्रम में भाग लूंगा, जिसमें मैं पिछले 25 वर्षों से प्रतिवर्ष भाग ले रहा हूं.
उन्होंने कहा कि वह ”कानून का पालन करने वाले”, ”कर्तव्यनिष्ठ” और देश के एक सामान्य नागरिक हैं. केजरीवाल ने कहा कि वह कानून के अनुपालन में जारी किए गए किसी भी समन का पालन करने से नहीं कतराते हैं, लेकिन ”(मुझे सलाह दी गई है) कि समन कानून के अनुरूप नहीं है.
केजरीवाल को मंगलवार को विपश्यना सत्र के लिए रवाना होना था, लेकिन विपक्षी गुट ‘इंडिया’ की बैठक में व्यस्त होने के कारण वह ऐसा नहीं कर सके. अधिकारियों ने बताया कि केजरीवाल पूर्व निर्धारित ध्यान सत्र के लिए बुधवार दोपहर करीब 1.30 बजे निकले.
आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को समन के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के वकील नोटिस का अध्ययन कर रहे हैं और ”कानूनी रूप से उचित” कदम उठाए जाएंगे. पार्टी ने कहा कि केजरीवाल का विपश्यना सत्र ”पूर्व निर्धारित” था और यह जानकारी सार्वजनिक थी.
आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा था, ”हर कोई जानता है कि मुख्यमंत्री 19 दिसंबर को विपश्यना के लिए जा रहे हैं. वह नियमित रूप से इस ध्यान सत्र के लिए जाते हैं. यह एक पूर्व निर्धारित और पूर्व घोषित कार्यक्रम है.” ईडी ने इससे पहले केजरीवाल को दो नवंबर को समन भेजा था, लेकिन नोटिस को गैर कानूनी और राजनीति से प्रेरित बताते हुए वह पूछताछ में शामिल नहीं हुए थे.