नयी दिल्ली. दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने के आरोप में कार्रवाई की मांग को लेकर दर्ज मामले में ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के प्रस्तोता समय रैना सहित पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की उपस्थिति दर्ज की और उन्हें याचिका के संबंध में अपना जवाब दाखिल करने को कहा.
उन पर दिव्यांगों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) तथा दृष्टिहीनता से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने का आरोप है.
उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है. शीर्ष अदालत ने हालांकि इन्फ्लुएंसर सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई को कुछ शारीरिक समस्या के कारण अगली सुनवाई की तारीख पर डिजिटल माध्यम से पेश होने की छूट दी.
पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा और उन्हें आगे कोई समय विस्तार नहीं दिया जाएगा.
इसके साथ ही अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख पर उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया जाएगा. शीर्ष अदालत ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कहा कि केंद्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों के अधिकारों एवं कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सोशल मीडिया के संदर्भ में दिशानिर्देश तैयार करें. वेंकटरमणी ने इस मुद्दे पर समय का अनुरोध किया और कहा कि दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता होगी. पीठ ने कहा कि एक व्यक्ति की स्वतंत्रता से दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए और जोर दिया कि इन दिशानिर्देशों को लागू करना सबसे कठिन है.
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, ”बाजार में कई मुफ्त सलाहकार हैं. उन्हें नजरअंदाज किया जाए. दिशानिर्देश संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप होने चाहिए जो व्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकारों व कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखें. फिर हम इसकी जांच करेंगे. हम ऐसे दिशानिर्देशों पर खुली बहस करेंगे. बार के सभी सदस्यों और तथाकथित हितधारकों सहित सभी हितधारकों को भी आकर अपनी राय देने दें.” न्यायाधीश ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित अनुच्छेद 19, जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 21 पर हावी नहीं हो सकता है.
अदालत ने व्यक्तिगत कदाचार की जांच पर विचार किया और कहा कि याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ ने एक गंभीर मुद्दा उठाया है. न्यायाधीश ने कहा, ”हमें यह समझने की जरूरत है कि गरिमा का अधिकार भी उस अधिकार से उत्पन्न होता है जिसका दावा कोई और कर रहा है. संविधान का अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 21 पर हावी नहीं हो सकता. मान लीजिए कि अनुच्छेद 19 और 21 के बीच कोई प्रतिस्पर्धा होती है, तो अनुच्छेद 21 को अनुच्छेद 19 पर भारी पड़ना होगा.” न्यायमूर्ति कांत ने एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह से कहा कि अदालत यह भावी पीढ़ी के लिए कर रही है और पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिशानिर्देशों के एक भी शब्द का दुरुपयोग न हो.
शीर्ष अदालत ने पांच मई को पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को निर्देश दिया कि वे उसके सामने पेश हों या दंडात्मक कार्रवाई का सामना करें, क्योंकि एक याचिका में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने शो में एक दुर्लभ विकार स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित व्यक्तियों और अन्य दिव्यांगताओं से पीड़ित लोगों का भी उपहास किया. शीर्ष अदालत ने रैना के अलावा चार अन्य इन्फ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर को नोटिस जारी किया है.
अदालत ने इन इन्फ्लुएंसर के आचरण को ”निराशाजनक” और ”खतरनाक” करार दिया और कहा कि कुछ गंभीर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं हों. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि किसी को भी अधिकार की आड़ में किसी को भी नीचा दिखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती और दिव्यांगों एवं दुर्लभ विकारों से ग्रस्त लोगों से संबंधित सोशल मीडिया सामग्री पर दिशानिर्देश बनाने पर विचार किया जाए.
पीठ ने मुंबई पुलिस आयुक्त को पांचों इन्फ्लुएंसर को अदालत में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नोटिस देने को कहा, अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. रैना पर महाराष्ट्र और असम पुलिस ने पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया के साथ उनके यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट” पर अपमानजनक टिप्पणियों के लिए मामला दर्ज किया था.
शीर्ष अदालत ने 18 फरवरी को इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी. अदालत ने उनकी टिप्पणियों को ”अश्लील” बताया था और कहा था कि उनके दिमाग में गंदगी भरी है जो समाज को शर्मसार करती है. इलाहाबादिया और रैना के अलावा असम मामले में जिन अन्य लोगों के नाम हैं उनमें ‘कॉमेडियन’ आशीष चंचलानी, जसप्रीत सिंह और अपूर्व मखीजा शामिल हैं.
यूट्यूबर समय रैना एनसीडब्ल्यू के समक्ष पेश हुए, टिप्पणी के लिए लिखित माफी मांगी
यूट्यूबर समय रैना मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के समक्ष पेश हुए और अपने शो “इंडियाज गॉट लेटेंट” में महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने पर लिखित माफी मांगी. दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने के आरोप में कार्रवाई की मांग को लेकर दर्ज मामले में ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के प्रस्तोता रैना सहित पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए.
एनसीडब्ल्यू ने एक ऑनलाइन मंच पर प्रसारित कार्यक्रम में आपत्तिजनक सामग्री को लेकर रैना को तलब किया था. एक बयान के अनुसार, एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजय राहतकर के समक्ष सुनवाई के दौरान रैना ने अपनी टिप्पणियों के लिए खेद व्यक्त किया और आयोग को आश्वासन दिया कि वह भविष्य में इस तरह के बयान देने से बचेंगे. एनसीडब्ल्यू के बयान में कहा गया है कि उन्होंने ऐसी सामग्री बनाने पर भी सहमति व्यक्त की जो महिलाओं की गरिमा को बनाए रखे और उनके अधिकारों और सम्मान के बारे में जागरूकता फैलाए.
राहतकर ने रैना से स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक हस्तियों को महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान प्रर्दिशत करना चाहिए, खासकर सार्वजनिक मंचों पर. उन्होंने रैना से आग्रह किया कि वह अपने काम के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभाएं.
एनसीडब्ल्यू ने शो के प्रतिभागियों और मेजबानों द्वारा महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों पर जन आक्रोश फैलने के बाद रैना को नोटिस जारी किया था. आयोग ने उन्हें पेश होने के लिए फरवरी से कई बार समन जारी किया था. रैना और अन्य प्रतिवादी यात्रा और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला देते हुए 17 फरवरी को हुई मूल सुनवाई में शामिल नहीं हुए थे.
एनसीडब्ल्यू ने सुनवाई को पुर्निनर्धारित किया और उन्हें भारत लौटने और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का समय दिया गया.
यह विवाद तब शुरू हुआ जब इस वर्ष के शुरू में हास्य-आधारित यूट्यूब प्रतिभा शो “इंडियाज गॉट लैटेंट” के क्लिप वायरल हो गए, जिसमें आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं. इसके बाद महाराष्ट्र साइबर प्रकोष्ठ द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई और एनसीडब्ल्यू ने इस मुद्दे पर स्वत? संज्ञान लिया. यूट्यूब से कार्यक्रम को फरवरी में हटा लिया गया था, और रैना ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी.