नयी दिल्ली/पुणे/भोपाल. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के लिए ‘स्टार्टअप इंडिया’ प्रचार पाने का एक साधन बन गया है और नरेन्द्र मोदी सरकार ‘राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस’ का ढोल पीट रही है जबकि यह अपेक्षित नतीजे देने में विफल रहा है. खरगे ने यह भी पूछा कि सरकार ने देश के मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में से 97.5 फीसदी को कर लाभ क्यों नहीं दिए.
कांग्रेस प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “मोदी सरकार ढोल पीट रही है और हमसे राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस मनाने के लिए कह रही है. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2016 में ‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत किए जाने के बाद से ही हमारे स्टार्टअप उद्यमियों, सर्जनात्मक लोगों और हमारे बेरोजग़ार युवाओं को निराशाजनक स्थिति में पहुंचा दिया गया.”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस तीन सवाल पूछना चाहती है — ” भाजपा ने 2019 के अपने घोषणापत्र में ‘स्टार्टअप सीड फंड’ के लिए 20,000 करोड़ रुपये का वादा किया. उसका क्या हुआ? सच्चाई: उन्होंने इसके लिए मात्र 525.27 करोड़ रुपये मंजूर किए और यह भी 2021-22 से शुरू होने वाली चार साल की अवधि के लिए.” कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा, “क्या यह सच है कि सिर्फ बीते दो साल में स्टार्टअप में काम करने वाले एक लाख लोगों ने अपनी नौकारियां गंवा दी हैं? हम उन पर कोविड-19 लॉकडाउन के प्रभाव की गिनती तक नहीं कर रहे हैं. इसमें हैरत की बात नहीं है कि स्टार्टअप का वित्तपोषण पांच साल में सबसे कम है.” उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार ने देश के मान्यता प्राप्त स्टार्टअप में से 97.5 फीसदी को कर लाभ क्यों नहीं दिए.
खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार ने लगभग हर बजट में वादा करने के बावजूद सिर्फ 2,975 स्टार्टअप को किसी तरह का कर लाभ दिया.
उन्होंने कहा, ” ‘स्टार्टअप इंडिया’ प्रधानमंत्री के लिए प्रचार हासिल करने का साधन बन गया है और यह अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका है.” खरगे ने पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की जिसमें कहा गया, “मोदी सरकार का स्टार्टअप इंडिया ‘नॉन-स्टार्टर’ बना हुआ है.” प्रधानमंत्री मोदी ने 16 जनवरी 2016 को ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल की शुरुआत की थी. इसका मकसद नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत ‘इकोसिस्टम’ खड़ा करना और देश में स्टार्टअप ‘इकोसिस्टम’ में निवेश को बढ़ावा देना था.
मोदी ने 16 जनवरी के दिन को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस घोषित किया था.
राम मंदिर का शिलान्यास तब किया गया जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे: शरद पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को दावा किया कि अयोध्या में राम मंदिर का ‘शिलान्यास’ तब किया गया था जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. पवार कर्नाटक के निपानी में एक सार्वजनिक बैठक में बोल रहे थे. अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर में रामलाला का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ”राजीव गांधी के कार्यकाल में शिलान्यास (पहला पत्थर रखना) किया गया था, लेकिन आज भाजपा और आरएसएस की ओर से भगवान राम के नाम पर राजनीति की जा रही है.” प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 11 दिवसीय उपवास (व्रत) रखने पर पवार ने कहा, ”राम के प्रति उनकी श्रद्धा का मैं सम्मान करता हूं, लेकिन यदि उन्होंने गरीबी को मिटाने के लिए उपवास रखने का फैसला किया होता तो जनता ने इसे सराहा होता.”
कांग्रेस ने कभी राम मंदिर का विरोध नहीं किया: दिग्विजय सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को आरोप लगाया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराने के पीछे भाजपा, आरएसएस और विहिप की मंशा उस स्थान पर मंदिर बनाने की नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए इसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बनाने की रही. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि कांग्रेस ने कभी भी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का विरोध नहीं किया. उन्होंने नए मंदिर के स्थान पर सवाल उठाया जहां 22 जनवरी को मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह होगा.
सिंह ने कहा, “(कांग्रेस ने) केवल विवादित भूमि पर (मंदिर के) निर्माण के लिए अदालत के फैसले तक इंतजार करने को कहा. गैर विवादित जमीन पर भूमि पूजन राजीव जी (पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी) के समय हुआ था. (पूर्व प्रधानमंत्री पीवी) नरसिम्हा राव जी ने भी राम मंदिर के निर्माण के लिए गैर-विवादित भूमि का अधिग्रहण किया था.” राज्यसभा सदस्य सिंह ने कहा, ” लेकिन भाजपा, विहिप और संघ को मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि मस्जिद गिराना था, क्योंकि जब तक मस्जिद नहीं गिरती तब तक मुद्दा हिंदू-मुसलमान का नहीं बनता. विध्वंस उनकी चाल एवं चरित्र में है. अशांति फैला कर राजनीतिक लाभ लेना उनकी रणनीति है.”
संपर्क करने पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने सिंह को “राम द्रोही” करार दिया और दावा किया कि कांग्रेस नेता और उनकी पार्टी सनातन धर्म के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में भगवान राम को ”काल्पनिक” व्यक्ति बताया था. चतुर्वेदी ने पूछा कि सिंह को स्पष्ट करना चाहिए कि वह कब तक “सनातन धर्म विरोधी और राम द्रोही” बने रहेंगे.