युवक कांग्रेस के सात राज्यों के 200 से अधिक पदाधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें रैली में शामिल न होने पर निलंबित कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी इंडी गठबंधन की रैली में शामिल न होने के कारण ऐसा किया गया।
इंडियन यूथ कांग्रेस ने 7 राज्यों के 200 से ज्यादा पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. इन सभी पर CEC ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर INDIA ब्लॉक की ओर से बुलाई गई रैली में शामिल नहीं होने का आरोप है.
हालांकि, यूथ कांग्रेस के कुछ निलंबित सदस्यों ने इस बात पर हैरानी जताई है कि पार्टी ने उन्हें सिर्फ एक घटना के आधार पर कैसे आंक लिया, जबकि उन्होंने पार्टी की सेवा में अपने जीवन के कई साल दिए हैं।
यूथ कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया को बिना अपनी बात रखने का मौका दिए उनके पद से हटा दिया गया। इस पर उन्होंने कहा, “हमने पार्टी के लिए एफआईआर का सामना किया और जेल भी गए। क्या हमें सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की वजह से हटाया जा रहा है?”
राजोरिया ने बताया कि कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा मनमाने ढंग से काम कर रही है, जबकि उन्होंने पार्टी के लिए 15 साल तक काम किया है। इस दौरान, पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने की वजह से उनके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज हुईं और उन्हें तीन-चार बार जेल भी जाना पड़ा।
उन्होंने एक कार्ड दिखाया, जिसमें लोगों से उनके दिवंगत चाचा की तेरवीं में शामिल होने का आग्रह किया गया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इस शोक के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था और यह भी बता दिया था कि वे 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की रैली के लिए दिल्ली नहीं आ पाएंगे।
यूथ कांग्रेस ने सबसे बड़ी कार्रवाई मध्य प्रदेश में की है, जहां 60 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके बाद गुजरात में 49 और पश्चिम बंगाल में 26 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा, तेलंगाना में 14, मध्य उत्तर प्रदेश में 13, कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में 13 और हरियाणा में 10 सदस्यों को निलंबित किया गया है।
अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण कार्यवाही है : भाजपा
भाजपा प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने कहा कि ‘रैली में 70% से अधिक सीटें खाली रहना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गढ़ा गया कांग्रेस का झूठा और नफरत भरा एजेंडा पूरी तरह पिट चुका है। खुद कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता भी अब इस नकारात्मक राजनीति का हिस्सा बनने को तैयार नहीं हैं। कार्यकर्ताओं के घरों में 12 साल बाद बच्चे के जन्म की खुशी, परिवार में दुखद निधन, गंभीर बीमारी या बहन की शादी जैसी मानवीय और अति-आवश्यक वजहों के बावजूद कांग्रेस ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई, यह अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।’